November 2, 2026

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जज बनकर न्यायिक अधिकारी को धमकाने वाले सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, सजा पर रोक लगाने की याचिका खारिज

महाठग सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी है। सुकेश ने अपनी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। यह मामला जज बनकर फोन करने और न्यायिक अधिकारी पर दबाव बनाने से जुड़ा है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने सुनवाई की। पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कोई कानूनी गलती नहीं है। साथ ही, सुकेश के खिलाफ चल रहे अन्य मामलों की सुनवाई जारी रहेगी।

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क्या है जज बनकर फोन करने का पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला साल 2017 के एक भ्रष्टाचार केस से जुड़ा है। आरोपों के मुताबिक, पुलिस हिरासत के दौरान सुकेश ने एक कांस्टेबल का मोबाइल फोन हासिल किया था। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट के एक जज के निजी सचिव बनकर संपर्क किया। फिर उसने खुद को जज बताकर संबंधित न्यायिक अधिकारी से बात की। आरोप है कि उसने अपने मामले में राहत और जमानत हासिल करने के लिए दबाव बनाया। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 20 अगस्त को उसे दोषी ठहराया था। इसके बाद 29 अगस्त को सजा सुनाई गई। सुकेश को IPC की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी पाया गया।

सुकेश को सरकारी अधिकारी का रूप धारण करने, धमकी देने और गुमनाम तरीके से आपराधिक धमकी देने के आरोपों में दोषी ठहराया गया। ये अपराध भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के अंतर्गत आते हैं। वहीं, सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े दूसरे मामलों की सुनवाई भी जारी है। हाल ही में जबरन वसूली मामले में नोरा फतेही के अदालत में पेश नहीं होने पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

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सेशन कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत

अपनी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने के लिए सुकेश ने पहले सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, वहां उसकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उसने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने भी उसे राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सुकेश ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उसकी ओर से वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने पक्ष रखा। वकील ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने सुकेश के खिलाफ पहले से दर्ज 31 आपराधिक मामलों का जिक्र किया था। इन मामलों में अभी उसे दोषी नहीं ठहराया गया है।

सुकेश के वकील ने आशंका जताई कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों का असर दूसरे मुकदमों पर पड़ सकता है। इससे उसे आगामी सुनवाई में नुकसान होने की संभावना है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में कोई ऐसी खामी नहीं है, जिसके आधार पर दखल दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुकेश के खिलाफ बाकी मामलों की सुनवाई स्वतंत्र रूप से होगी। हर मामले का फैसला उसके तथ्यों और लागू कानून के आधार पर किया जाएगा।

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