उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर इलाके में पुलिस ने एक छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में पुराने नोट जब्त किए हैं, जो 2016 में नोटबंदी के बाद अमान्य कर दिए गए थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि अवैध रूप से कैश की आवाजाही हो रही है, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। इस छापेमारी में 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों से भरे कई बैग बरामद हुए। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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एक पुलिस सूत्र ने बताया कि कई लोग जिनके पास पुराने नोटों से भरे बैग थे, उन्हें मौके से हिरासत में लिया गया। पुलिस ने नकदी ले जाने के लिए इस्तेमाल किए गए दो वाहनों को भी जब्त किया है। अधिकारी के अनुसार, पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता चल सके कि नकदी कहां से आई और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क था। मामले की जांच जारी है। गिरफ्तार चार आरोपियों में से तीन दिल्ली के हैं, जबकि एक आरोपी हिमाचल प्रदेश का निवासी है। गिरफ्तार आरोपियों में 22 वर्षीय हर्ष और 39 वर्षीय टेक चंद रोहिणी के सेक्टर 25 के रहने वाले हैं, जबकि 28 वर्षीय लक्ष्य बृजपुरी का निवासी है। चौथा आरोपी, 38 वर्षीय विपिन कुमार हिमाचल प्रदेश के जोगिंदर नगर का रहने वाला है, लेकिन वह शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन के पास रह रहा था।
आरोपियों पर पुराने नोट रखने और धोखाधड़ी का आरोप
आरोपियों के पास से ₹500 और ₹1000 के पुराने नोट बरामद हुए हैं, जिनकी कुल फेस वैल्यू 3.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है। पुलिस ने आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की गई दो गाड़ियों को भी जब्त किया है। पूछताछ में आरोपियों ने माना कि उन्होंने इन अमान्य नोटों को बहुत कम कीमत पर यह दावा करके बदला कि इन्हें आरबीआई में बदला जा सकता है, जिससे धोखाधड़ी, साजिश और स्पेसिफाइड बैंक नोट्स एक्ट का उल्लंघन हुआ है। पुलिस ने कहा कि सभी आरोपी जानते थे कि ऐसे पुराने नोट रखना गैर-कानूनी है और उनके पास इसे रखने का कोई वैध दस्तावेज या कारण नहीं था। वे जल्दी पैसे कमाने के लालच में इस धोखाधड़ी में शामिल हुए।
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