हर साल 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस मनाकर सरदार पटेल के योगदान का सम्मान करता है। यह दिन उस महान नेता को समर्पित रहता है जिसने बिखरी रियासतों को एक सूत्र में बाँधा। वे भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री होकर भी सिर्फ अधिकारी नहीं, एकता का प्रतीक बने। उनकी दूरदर्शिता ने आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखकर राष्ट्रीय समरसता को दिशा प्रदान की।
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राष्ट्रीय प्रेरणा: सरदार पटेल के योगदान का महत्व
सरदार पटेल की जयंती को 2014 में आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मान्यता मिली। इस दिन का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता मजबूत करना है। देशभर में स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों में “Run for Unity” और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। यह दिवस “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बनता है। आजादी के समय भारत 562 अलग-अलग रियासतों में बंटा था, जिससे व्यवस्था अस्थिर थी। सरदार पटेल ने अपने दृढ़ नेतृत्व से इन सभी रियासतों को भारत संघ में शामिल कराया। उन्होंने हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी महत्वपूर्ण रियासतों को भी समझदारी से भारत में जोड़ा। उनके मार्गदर्शन में बनी राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया ने प्रशासनिक ढांचा और मजबूत किया।
आज सोशल मीडिया और विचारधाराएं समाज में नई दूरियाँ पैदा कर रही हैं। ऐसे समय में राष्ट्रीय एकता दिवस हमें भारत की विविधता में छिपी एकता याद दिलाता है। यह दिन बताता है कि भाषा, संस्कृति और परंपराएँ भले अलग हों, लेकिन हमारा राष्ट्र एक है। युवा पीढ़ी इस दिवस से सीखती है कि देश तभी मजबूत होता है जब लोग एकजुट रहते हैं। देशभर में “Run for Unity” आयोजित करके एकता का संदेश सक्रिय रूप से फैलाया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में भाषण, निबंध, पोस्टर और क्विज़ जैसे कार्यक्रम उत्साहपूर्वक आयोजित किए जाते हैं। प्रतिज्ञा समारोह में लोग राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा का संकल्प लेते हैं। गुजरात स्थित 182 मीटर ऊँची ‘Statue of Unity’ पर श्रद्धांजलि देकर सरदार पटेल को सम्मान मिलता है।
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