पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (06 जनवरी) को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान आयोग केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के IT सेल द्वारा विकसित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है। इस बीच, दक्षिण 24 परगना जिले में सागर द्वीप की अपनी दो दिवसीय यात्रा पूरी करने से पहले उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। उल्लेखनीय है कि वह वहां आगामी गंगासागर मेले की तैयारियों की समीक्षा के लिए गई थीं।
बातचीत के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनावी सूची के पुनरीक्षण के नाम पर आयोग अनुचित और संदिग्ध तरीकों का सहारा ले रहा है। नतीजतन, उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के दौरान कई योग्य मतदाताओं को गलत तरीके से ‘मृत’ घोषित किया जा रहा है। इसके अलावा, बुजुर्गों, बीमारों और अस्वस्थ लोगों को सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आयोग इस प्रक्रिया में BJP के IT सेल से जुड़े मोबाइल ऐप्स का उपयोग कर रहा है। उनके अनुसार, यह पूरी तरह अवैध, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। इसलिए, ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इस तरह की प्रक्रिया को किसी भी हालत में जारी नहीं रहने दिया जा सकता।
इसी बीच, चुनाव आयोग के खिलाफ मुख्यमंत्री के आरोपों को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। इसके साथ ही, उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को कानूनी स्तर पर भी उठाया है।
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला और टकराव तेज
इसी क्रम में, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में SIR को लागू करने के दौरान आयोग ने मनमानी की और कई प्रक्रियात्मक गलतियां कीं। परिणामस्वरूप, पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया से राज्य के वास्तविक और पात्र मतदाताओं की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
इसके बाद, ममता बनर्जी ने आम लोगों से अपील की कि वे SIR प्रक्रिया में भाग लेते समय सतर्क रहें। साथ ही, उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे उन लोगों के साथ खड़े रहें जिन्हें इस प्रक्रिया के दौरान मदद की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत समर्थन की जरूरत नहीं है, बल्कि उन नागरिकों का साथ दिया जाना चाहिए जो इस अभ्यास के कारण परेशान हैं।
अंततः, विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग और भाजपा के साथ टकराव को और तेज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह राज्य में SIR के खिलाफ अदालत का रुख करेंगी। इससे पहले भी उन्होंने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया के दौरान डर, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी देखने को मिली है। उनके दावे के अनुसार, इसके चलते कुछ मामलों में लोगों की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं भी सामने आईं। अपने ताजा बयान में उन्होंने एक बार फिर चुनाव आयोग और भाजपा — दोनों पर एक साथ निशाना साधा है।
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