ललिता जयंती का व्रत 1 फरवरी को मनाया जाएगा। माता ललिता, जिन्हें त्रिपुरा सुंदरी भी कहा जाता है, त्रिपुरार्णव में वर्णित तीन नाड़ियों – इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना – में निवास करती हैं, जो मन, बुद्धि और चित्त का प्रतीक हैं। मां के तीन प्रमुख रूप हैं – आठ वर्षीय बालिका रूप जिसे त्रिपुरा सुंदरी कहा जाता है, सोलह वर्षीय किशोरी रूप जिसे षोडषी कहा जाता है, और युवा स्वरूप जिसे ललिता कहा जाता है। माता ललिता को मनोकामनाओं को पूर्ण करने और मोक्ष देने वाली देवी माना जाता है। आइए जानते हैं कि इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब है और किन विधियों से माता की पूजा करनी चाहिए।
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ललिता जयंती 2026 में 1 फरवरी को माघ माह की पूर्णिमा तिथि के रूप में मनाई जाएगी, जो सुबह 5:52 बजे से शुरू होकर 2 फरवरी को 3:38 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 1 फरवरी को रखा जाएगा। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:24 से 6:17 बजे तक, प्रात: संध्या 5:57 से 7:13 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:30 से 1:15 बजे तक, और सायाह्न संध्या शाम 6:32 से 7:48 बजे तक। इन मुहूर्तों में पूजा करने से देवी ललिता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
सही तरीके से करें पूजा और पाएं मां की कृपा
जयंती के दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान आदि करें और फिर सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर मां ललिता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। अगर मां ललिता की तस्वीर न हो, तो श्री यंत्र भी स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद धूप-दीप जलाकर, मां को अक्षत, फल-फूल और कुमकुम अर्पित करें। फिर मां ललिता की कथा का पाठ करें और अंत में माता की आरती का संकीर्तन करें। पूजा समाप्ति पर प्रसाद का वितरण करें। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को शाम की पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करना चाहिए और घर के अन्य सदस्य को भी प्रसाद वितरित करना चाहिए।


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