जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों ने अनुच्छेद-370 और 35ए को हटाए जाने से पहले ही राज्य में गुपकार गठबंधन बनाया था। हालांकि, लोकसभा चुनाव के करीब आते-आते यह गठबंधन बिखर गया। अब विधानसभा चुनावों के बाद यह गठबंधन फिर से सक्रिय हो सकता है या नहीं, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
गुपकार गठबंधन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को पुनर्स्थापित करना और राज्य के अधिकारों की रक्षा करना था। चुनावी राजनीति में परिवर्तन और विभिन्न दलों के दृष्टिकोण में अंतर के कारण गठबंधन का भविष्य संदेह में है। हालांकि, कुछ नेता इस बात की संभावना जता रहे हैं कि अगर राजनीतिक परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं, तो यह गठबंधन फिर से एकजुट हो सकता है।
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इस स्थिति में, आगामी विधानसभा चुनावों के परिणाम और दलों के बीच संवाद की गुणवत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। क्या गुपकार गठबंधन अपनी पूर्व स्थिति को फिर से हासिल कर पाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
जम्मू-कश्मीर चुनाव: गुपकार गठबंधन की सक्रियता की संभावना
जम्मू-कश्मीर में आज विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण का मतदान हो रहा है। इसके साथ ही उम्मीदवारों की किस्मत अब ईवीएम में कैद हो जाएगी। अब तक के अनुमानों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में किसी एक पार्टी या गठबंधन की सरकार बनते हुए नहीं दिख रही है। ऐसे में एक बार फिर गुपकार गठबंधन के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।
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केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 और 35ए को निरस्त कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने गुपकार गठबंधन बनाया था, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी। हालांकि, बाद में कांग्रेस ने इस गठबंधन से खुद को अलग कर लिया था। अब विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद, राजनीतिक दलों के बीच नए समीकरण बनने की उम्मीद है, जो गुपकार गठबंधन के फिर से सक्रिय होने की संभावना को जन्म दे सकता है।
कब और कैसे बना था गुपकार गठबंधन
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के श्रीनगर स्थित घर का पता है, 01, गुपकार रोड। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटकों को राज्य छोड़ने की सलाह दिए जाने के बीच, चार अगस्त 2019 को राज्य के आठ दलों ने एक बैठक की थी। इन दलों ने जम्मू-कश्मीर के लिए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ गठबंधन बनाया, जिसे गुपकार गठबंधन नाम दिया गया।
इस गठबंधन का उद्देश्य राज्य के विशेष दर्जे की रक्षा करना था। इसके एक दिन बाद ही, केंद्र सरकार ने संसद के जरिए अनुच्छेद-370 और 35ए को हटा दिया था। लगभग एक साल बाद, 22 अगस्त को गुपकार गठबंधन के नेता फिर से फारूक अब्दुल्ला के घर पर मिले।
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