चांद पर तिरंगा फहराने निकले चंद्रयान-3 को आज पूरा एक महीना बीत गया है। चंद्रयान-3 लगातार और सफलतापूर्वक चांद के हाईवे पर यात्रा कर रहा है। आज से करीब 9 दिन बाद यानी 23 अगस्त को यह चांद की सतह पर लैंड करेगा। लेकिन आज 14 अगस्त का दिन भी चंद्रयान-3 के लिए बेहद खास है।
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14 अगस्त को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक बार फिर चंद्रयान-3 की ऑर्बिट को कम करने का प्रयास करेगा। इस क्रिया का आयोजन सोमवार को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच किया जाएगा, जिससे चंद्रयान-3 चांद के करीब आएगा। इस प्रकार, आज चांद की चौथी ओर्बिट में प्रवेश करेगा। पहले प्रयास को 9 अगस्त को किया गया था, जिसके बाद अंतरिक्ष यान की ऑर्बिट 174 किलोमीटर x 1,437 किलोमीटर तक कम हो गई थी। पिछले पांच अगस्त को सफलतापूर्वक चंद्रमा की ऑर्बिट में प्रवेश किया था। अब अगली डी-ऑर्बिटिंग 16 अगस्त को आयोजित की जाएगी।
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चंद्रयान-3: चांद की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
मालूम हो कि चंद्रयान-3, 23 अगस्त को चांद की सतह पर लैंड करेगा और 14 दिनों तक यहां काम करेगा। इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और घूमने में शुरू से अंत तक क्षमता प्रदर्शित करना है। अंतर-ग्रहीय मिशनों के लिए आवश्यक नई तकनीकों को विकसित करने और प्रदर्शित करने के लिए एक स्वदेशी प्रणोदन मॉड्यूल, एक लैंडर मॉड्यूल और एक रोवर शामिल है।
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वहीं पिछले हफ्ते, इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने विश्वास जताया था कि विक्रम लैंडर 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। सोमनाथ ने कहा था कि भले ही चंद्रयान-3 के सभी सेंसर या इंजन फेल हो जाएं, लेकिन लैंडर चंद्रमा की सतह पर उचित लैंडिंग करेगा। सोमनाथ ने कहा कि लैंडर ‘विक्रम’ को इस तरह से बनाया गया है कि यह विफलताओं को संभालने में सक्षम होगा।
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