July 17, 2026

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ISRO से वैज्ञानिकों के बढ़ते इस्तीफों के बीच सरकार का बड़ा कदम, नौकरी छोड़ने के नियम हुए और सख्त

ISRO राष्ट्रीय महत्व के अंतरिक्ष मिशनों पर असर रोकने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने इस्तीफों और वीआरएस प्रक्रिया को केंद्रीय स्तर पर नियंत्रित करने का फैसला लिया।

डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने इसरो के महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के लगातार बढ़ते इस्तीफों के बाद सख्त निर्णय लिया। अब ISRO के वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफों के बाद डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने गगनयान सहित राष्ट्रीय महत्व के मिशनों से जुड़े कर्मचारियों के इस्तीफे और VRS नियम सख्त कर दिए हैं। ISRO जानिए नए साथ ही आदेश की पूरी जानकारी।गगनयान सहित राष्ट्रीय परियोजनाओं में कार्यरत वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर अंतिम निर्णय सीधे विभाग करेगा। पहले संबंधित केंद्रों के निदेशक ऐसे मामलों में मंजूरी देने का अधिकार रखते थे।ISRO हालांकि नए निर्देशों के बाद यह अधिकार प्रभावी ISRO रूप से वापस ले लिया गया है। इसके अलावा विभाग ने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारियों के आवेदन सामान्य परिस्थितियों में स्वीकार नहीं होंगे। इसलिए संबंधित वैज्ञानिकों के मामलों को केंद्र निदेशक की सिफारिश सहित अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

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इसलिए, गगनयान मिशन पर रहेगा पूरा फोकस

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार हालिया महीनों में बड़ी संख्या में वैज्ञानिक इसरो छोड़ चुके हैं। हालांकि विभाग ने आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन कई वरिष्ठ सूत्रों ने जानकारी साझा की। उनके अनुसार लगभग 100 से 120 वैज्ञानिक और कर्मचारी हालिया अवधि में संगठन छोड़ चुके हैं। इसके अलावा यूआर राव सैटेलाइट सेंटर से करीब 80 कर्मचारियों ने इस्तीफा देने की जानकारी सामने आई। वहीं विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से भी लगभग 20 वैज्ञानिकों के जाने की बात कही गई। इसलिए विभाग इन इस्तीफों को गंभीरता से देख रहा है। दूसरी ओर कुछ मामलों पर अभी प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है। परिणामस्वरूप अंतिम संख्या आने वाले समय में और बढ़ सकती है, जिससे चिंताएं लगातार गहराती दिखाई दे रही हैं।

सूत्रों के अनुसार इस्तीफा देने वालों में कई वरिष्ठ और अनुभवी वैज्ञानिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें एलवीएम-3 परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ का नाम प्रमुखता से सामने साथ ही आया है। इसके अलावा यूआरएससी के स्पेडेक्स मिशन से जुड़े प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने भी संगठन छोड़ दिया। वहीं चंद्रयान-3 मिशन से जुड़े एक प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिक ने भी हाल में इस्तीफा दिया है। हालांकि इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि कर्मचारी परिवर्तन किसी भी संगठन की सामान्य प्रक्रिया होती। फिर भी उन्होंने स्वीकार किया साथ ही कि एजेंसी इस स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रत्येक जिम्मेदारी संभालने के लिए वैकल्पिक विशेषज्ञों की तैयारी लगातार जारी रहेगी।

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हालांकि इसरो में कुल कर्मचारियों की संख्या 14600 से अधिक है, फिर भी चिंता लगातार बढ़ रही। इसकी मुख्य वजह यह है कि अधिकांश इस्तीफे रणनीतिक महत्व वाले केंद्रों और मिशनों से जुड़े। उदाहरण के तौर पर यूआरएससी में 1339 कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि वीएसएससी में 4577 कर्मचारी मौजूद थे। दूसरी ओर चंद्रयान-3 मिशन में कार्यरत विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी गई थी। मिशन के दौरान लाखों परीक्षणों से तैयार डेटा ने सुरक्षित चंद्र लैंडिंग सुनिश्चित करने में अहम योगदान दिया। इसलिए अनुभवी वैज्ञानिकों का अचानक संगठन छोड़ना कई भविष्य की परियोजनाओं पर प्रभाव डाल सकता है। परिणामस्वरूप सरकार अब विशेषज्ञों को बनाए रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अधिक सक्रिय रणनीति अपना रही है।

नए आदेश के तहत गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व वाले मिशनों से साथ ही जुड़े वैज्ञानिकों के आवेदन सख्ती से परखे जाएंगे। अब केंद्र निदेशक केवल अपनी सिफारिश भेजेंगे, जबकि अंतिम मंजूरी डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ही देगा। इससे पहले वर्ष 2020 के प्रशासनिक आदेश ने केंद्र प्रमुखों को ऐसे मामलों में निर्णय साथ ही लेने का अधिकार दिया। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने वह व्यवस्था प्रभावी रूप से बदलने का फैसला लिया। इसके अलावा सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 2024 के बीच लगभग 700 कर्मचारी इसरो छोड़ चुके। वहीं नई भर्ती प्रक्रिया के बावजूद अनुभवी वैज्ञानिकों की भरपाई आसान नहीं मानी जा रही है। इसलिए सरकार साथ ही दीर्घकालिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों की निरंतर सफलता सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम लागू कर रही है।

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