नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में मॉनसून की शुरुआत उम्मीदों के अनुरूप जोरदार रही, लेकिन पिछले कुछ दिनों से बारिश लगभग थम गई है। लगातार बादल छाने के बावजूद वर्षा नहीं होने से उमस और गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में फिलहाल ‘ब्रेक मॉनसून’ की स्थिति बनी हुई है। इस दौरान बारिश कराने वाले बादलों की सक्रियता कम हो जाती है और आसमान अपेक्षाकृत साफ रहने लगता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति मॉनसून ट्रफ में बदलाव के कारण पैदा हुई है। ट्रफ कम वायुदाब वाली वह लंबी पट्टी होती है, जो नमी से भरी हवाओं को ऊपर उठाकर बादल और बारिश बनने में अहम भूमिका निभाती है। इसके कमजोर या खिसकने से वर्षा गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
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ब्रेक मॉनसून और ट्रफ में बदलाव बना बड़ी वजह
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मॉनसून ट्रफ इस समय उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों से हटकर हिमालय की तलहटी की ओर पहुंच गई है। मौसम केंद्र लखनऊ के वैज्ञानिक एम. दानिश ने बताया कि ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने से उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में ही बारिश हो रही है, जबकि राज्य के अधिकांश हिस्से सूखे बने हुए हैं। गोरखपुर, बलरामपुर और कुशीनगर जैसे जिलों में बारिश दर्ज की जा रही है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में वर्षा की गतिविधियां बेहद कमजोर हैं। पिछले सप्ताह बने कम दबाव के क्षेत्र ने भी मॉनसून ट्रफ को उत्तर की ओर धकेलने में भूमिका निभाई। इसी बदलाव के कारण बारिश का दायरा सीमित हो गया और कई इलाकों में उमस के साथ तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि उत्तर-पूर्वी बिहार, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर असम के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने बंगाल की खाड़ी से आने वाली अधिकांश नमी अपनी ओर खींच ली है। इसके कारण उत्तर-पश्चिम भारत तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पा रही है और दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के राज्यों में बारिश रुक गई है। उन्होंने कहा कि ब्रेक मॉनसून की स्थिति तब बनती है, जब मॉनसून ट्रफ हिमालय की तलहटी की ओर खिसक जाती है। इसके बाद ट्रफ के दक्षिणी हिस्से में पश्चिमी दिशा से चलने वाली शुष्क हवाएं नमी का स्तर तेजी से घटा देती हैं। नमी कम होने से बादलों का निर्माण रुक जाता है, वर्षा नहीं होती और तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
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साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने कैसे बदला मौसम का मिजाज
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में जुलाई और अगस्त के दौरान ब्रेक मॉनसून की स्थिति एक-दो बार बनती है और यह चार से छह दिनों तक रहती है। हालांकि इस बार यह अवधि बढ़कर लगभग 11 से 12 दिनों तक पहुंच गई है, जिसे असामान्य माना जा रहा है। महेश पलावत का मानना है कि इस लंबे सूखे दौर के पीछे अल नीनो का प्रभाव भी जिम्मेदार हो सकता है। उनके अनुसार, वैश्विक जलवायु परिवर्तन और समुद्री तापमान में बदलाव ने मॉनसून के व्यवहार को प्रभावित किया है। इसका असर जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहा है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है और आने वाले दिनों में मॉनसून फिर से सक्रिय होगा।
भारतीय मौसम विभाग और निजी मौसम एजेंसियों के अनुसार, मॉनसून ट्रफ धीरे-धीरे दक्षिण की ओर लौटेगा, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं। अगले तीन से चार दिनों में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि दिल्ली में फिलहाल केवल आंशिक बादल छाए रहने के आसार हैं। महेश पलावत ने कहा कि 20 जुलाई के बाद मॉनसून ट्रफ दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू करेगी, जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दोबारा अच्छी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही तापमान में गिरावट आएगी और उमस से भी राहत मिलेगी। तब तक लोगों को गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम का सामना करना पड़ सकता है।


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