डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने रूस से 288 S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इनकी अनुमानित लागत करीब ₹10,000 करोड़ आंकी गई है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और भारत अपनी वायु रक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत करने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम के व्यापक उपयोग के बाद मिसाइलों के स्टॉक को फिर से भरना आवश्यक माना गया। इसी वजह से इस खरीद को प्राथमिकता श्रेणी में रखते हुए फास्ट ट्रैक प्रोसीजर (FTP) के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि कम समय में आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और किसी भी संभावित खतरे का तत्काल जवाब दिया जा सके।
खरीद का विवरण और वायुसेना की तैयारी
DAC ने इस प्रस्ताव को Acceptance of Necessity (AoN) प्रदान की है, जो रक्षा खरीद प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण होता है। AoN मिलने के बाद विस्तृत लागत वार्ता, तकनीकी औपचारिकताएं और अंतिम अनुबंध की प्रक्रिया शुरू होती है। इस सौदे में कुल 288 मिसाइलें शामिल हैं, जिनमें 120 शॉर्ट-रेंज और 168 लॉन्ग-रेंज मिसाइलें हैं। शॉर्ट-रेंज मिसाइलें कम दूरी से आने वाले तात्कालिक खतरों को रोकने में सक्षम होंगी, जबकि लॉन्ग-रेंज मिसाइलें लंबी दूरी से आने वाले विमान, ड्रोन या मिसाइलों को निशाना बना सकेंगी। इस तरह यह सौदा बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
भारतीय वायुसेना पहले ही S-400 के पांच स्क्वाड्रन का अनुबंध कर चुकी है। इनमें से कुछ स्क्वाड्रन तैनात हो चुके हैं, जबकि दो और स्क्वाड्रन इसी वर्ष जून और नवंबर तक मिलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, वायुसेना पांच और S-400 सिस्टम के साथ Pantsir एयर डिफेंस सिस्टम की भी मांग कर रही है, ताकि शॉर्ट और लॉन्ग रेंज दोनों स्तरों पर एक मजबूत रक्षा कवच तैयार किया जा सके। रणनीतिक दृष्टि से यह कदम भारत की हवाई सीमाओं की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और समग्र रक्षा तैयारी को नई मजबूती प्रदान करेगा।
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ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका और S-400 की क्षमता
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 से 10 मई तक ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसे हाल के दशकों में भारत-पाकिस्तान के बीच सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक माना गया। इस अभियान में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका निर्णायक रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिस्टम ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमान, AWACS (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम), इंटेलिजेंस एयरक्राफ्ट और सशस्त्र ड्रोन को प्रभावी रूप से निशाना बनाया। इसके कारण दुश्मन की हवाई गतिविधियां काफी हद तक सीमित हो गईं और रणनीतिक बढ़त भारत के पक्ष में रही।
इसके अलावा, एक लॉन्ग-रेंज मिसाइल से लगभग 314 किमी दूर स्थित लक्ष्य को भी साधा गया, जो इसकी लंबी दूरी की मारक क्षमता को दर्शाता है। अदमपुर और भुज सेक्टर में तैनात S-400 सिस्टम ने संभावित मिसाइल खतरों को भी विफल किया, जिससे संवेदनशील सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। S-400 ट्रायम्फ की मारक क्षमता 40 किमी से लेकर 400 किमी तक है और यह लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन जैसे विभिन्न हवाई खतरों को ट्रैक कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। 288 नई मिसाइलों की यह खरीद न केवल मौजूदा स्टॉक को मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भारत की हवाई रक्षा को और अधिक सक्षम और विश्वसनीय बनाएगी।
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