चीन ने अरुणाचल प्रदेश में ग्यारह स्थानों का नाम बदल दिया है, जिसे वह दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है। इन क्षेत्रों में दो भूमि क्षेत्र, दो आवासीय क्षेत्र, पाँच पर्वत चोटियाँ और दो नदियाँ शामिल हैं। चीन पहले भी दो बार इन क्षेत्रों का नाम बदल चुका है। इस बीच, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा है कि भारत, रूस और चीन उभरती हुई ताकतें हैं और चीन भारत और रूस के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है।
चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में बताया गया कि चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के नामों की लिस्ट जारी की है। बदले हुए नाम तीन भाषाओं में जारी किए गए हैं। चीनी, तिब्बती और पिनयिन। अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन जगहों का नाम बदला गया है उनमें अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के करीब स्थित एक शहर भी शामिल है।
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अरुणाचल प्रदेश के नामों का ऐलान एक वैध कदम है। ये भौगोलिक नामों को मानकीकृत करने का चीन का संप्रभु अधिकार है।
पहले भी दो बार कर चुका है
इससे पहले, चीन की तरफ से 13 अप्रैल 2017 को अरुणाचल प्रदेश के छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली लिस्ट जारी की गई थी। तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा का अरुणाचल प्रदेश दौरा खत्म होने के एक दिन बाद। तब चीन ने दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा की काफी आलोचना की थी।
फिर जनवरी 2021 में एक नए सीमा सुरक्षा कानून के प्रभावी होने से पहले चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 15 जगहों का नाम बदल दिए थे। भारत ने 2021 में चीन के इस कदम को खारिज कर दिया था और कहा था कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्र की स्थिति नहीं बदलेगी।
इस बात की जानकारी नहीं है कि चीन ने अचानक नए नाम जारी करने का ये फैसला क्यों लिया। भारत की तरफ से अभी तक इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बता दें, अरुणाचल प्रदेश पर नियंत्रण को लेकर भारत का चीन के साथ लंबे समय से सीमा विवाद चल रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन अरुणाचल प्रदेश में लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर भूमि का दावा करता है। जबकि भारत ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा, चीन ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण का दावा करने के अपने प्रयासों को बंद नहीं किया है।


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