बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने सहरसा में तैनात पथ निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता विजय कुमार के पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। टीम ने पटना, सहरसा और औरंगाबाद में उनके घरों और कार्यालयों की तलाशी ली। शुरुआती जांच में इंजीनियर के पास आय से करीब 140 गुना अधिक संपत्ति मिलने का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। बुधवार सुबह शुरू हुई छापेमारी देर रात तक जारी रही।
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छापेमारी में नकदी, जेवर और करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
जांच अधिकारियों को विजय कुमार और उनकी पत्नी रानी कुमारी के नाम पर करीब 3.28 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति मिली है। इसमें लगभग 3.08 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। तलाशी के दौरान टीम को एक आवास से 31.42 लाख रुपये नकद मिले। इसके अलावा सोने-चांदी के 23 लाख रुपये से अधिक के जेवर और बैंक खातों में जमा रकम से जुड़े दस्तावेज भी मिले। अधिकारियों को एलआईसी, टाटा एआईजी और अन्य कंपनियों में निवेश से संबंधित कागजात भी हाथ लगे।
पटना के गोला रोड स्थित सांई शरणम अपार्टमेंट में छापेमारी के दौरान एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, फ्लैट का दरवाजा नहीं खुलने पर कुछ लोगों ने खिड़की से नोटों के बंडल बाहर फेंकने शुरू कर दिए। निगरानी टीम ने इन नोटों को जब्त कर लिया। तलाशी के दौरान अधिकारियों को कई फाइलों के अंदर भी नकदी छिपाकर रखी हुई मिली। इसके अलावा दो बैंकों में जमा करीब 10 लाख रुपये से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए।
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पत्नी के नाम पर बैंक खाते, प्लॉट और आलीशान मकान
जांच में विजय कुमार और उनकी पत्नी के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक में सात और बैंक ऑफ बड़ौदा में दो खाते मिले। इन खातों में कुल 1.29 करोड़ रुपये से अधिक जमा होने की जानकारी सामने आई। दोनों के नाम पर एक स्कॉर्पियो और एक आई-10 कार भी मिली। इसके अलावा पटना के महेश नगर में एक फ्लैट और अलग-अलग इलाकों में कई जमीनों के दस्तावेज मिले। जांच अधिकारियों ने गोला रोड और आसपास के क्षेत्रों में बने तीन और छह मंजिला मकानों की भी जानकारी जुटाई।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, विजय कुमार ने 22 दिसंबर 2004 को सरकारी सेवा में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने पटना, गया, सहरसा और अन्य स्थानों पर अलग-अलग पदों पर काम किया। निगरानी इकाई को संदेह है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अवैध तरीकों से संपत्ति अर्जित की। जांच एजेंसी उनकी आय, निवेश, बैंक खातों और जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद अवैध संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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