शुक्रवार तड़के भारत में एक के बाद एक भूकंप के दो झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में हल्की घबराहट फैल गई और कई लोग एहतियातन अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इन झटकों से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई। यह भूकंप सिक्किम में दर्ज किया गया, जहां स्थानीय प्रशासन ने तुरंत स्थिति पर नजर बनाए रखी और लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
अधिकारियों के अनुसार, सिक्किम की राजधानी गंगटोक में दोनों झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि पहला भूकंप सुबह 4:26 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 दर्ज की गई। यह झटका गंगटोक से लगभग 10.7 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में और करीब 5 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया, जिससे आसपास के क्षेत्रों में हल्की कंपन महसूस हुई।
इसके कुछ ही समय बाद दूसरा झटका भी महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 2.7 मापी गई। यह भूकंप गंगटोक से लगभग 11.2 किलोमीटर पश्चिम दिशा में और करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। हालांकि दोनों झटकों की तीव्रता कम थी, लेकिन अचानक आने के कारण लोगों में डर का माहौल बन गया और उन्होंने सुरक्षा के लिए खुले स्थानों का रुख किया।
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झटके के बाद कोई नुकसान नहीं, प्रशासन अलर्ट पर
प्रशासन और अधिकारियों ने साफ किया कि हिमालयी राज्य के किसी भी हिस्से से अब तक किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं मिली है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें भी सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही हैं।
भूकंप आने के पीछे वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो पृथ्वी के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स इसकी मुख्य वजह होती हैं। ये प्लेट्स लगातार गतिशील रहती हैं और जब इनमें टकराव या घर्षण होता है, तो ऊर्जा के रूप में झटके महसूस होते हैं। हाल के दिनों में देश और दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों में भी चिंता बढ़ी है।
भारत में भूकंप के खतरे को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने देश को चार जोन—जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5—में विभाजित किया है। इनमें जोन-5 सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है, जबकि जोन-2 अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला है। राजधानी दिल्ली जोन-4 में आती है, जहां तेज तीव्रता के भूकंप की आशंका बनी रहती है। हिमालयी क्षेत्र, कच्छ और पूर्वोत्तर भारत जैसे इलाके अधिक संवेदनशील हैं, क्योंकि भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे भूकंपीय गतिविधियां बढ़ती रहती हैं।
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