भारत के पश्चिमी घाट के घने जंगल किंग कोबरा का प्राकृतिक आवास माने जाते हैं, क्योंकि वहां उसे पर्याप्त शिकार, पानी और सुरक्षित आश्रय मिलते हैं. आमतौर पर यह सांप जंगलों से बाहर नहीं आता, लेकिन हालिया अध्ययन ने इसके संरक्षण को लेकर नई चिंता पैदा की है. सूरत के वैज्ञानिक और सरीसृप विशेषज्ञ दिकांश परमार ने शोध में संकेत दिया कि भारत में किंग कोबरा अनजाने में ट्रेनों तक पहुंचकर लंबी दूरी तय कर सकता है.
गोवा जाने वाली कई रेल लाइनें घने जंगलों से होकर गुजरती हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार शिकार या छिपने की जगह तलाशते समय किंग कोबरा पटरियों या खड़ी ट्रेनों के पास पहुंच जाता है और फिर दूर क्षेत्रों तक पहुंच सकता है, जहां उसे भोजन और सुरक्षित वातावरण नहीं मिलता. यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘बायोट्रोपिका’ में प्रकाशित हुआ, जो पारिस्थितिकी और संरक्षण पर केंद्रित है. अध्ययन में यह भी संभावना जताई गई कि दुनिया का सबसे लंबा विषैला सांप ओफियोफैगस कालिंगा अनजाने में रेल यात्रा कर रहा है.
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भोजन की तलाश और मौसमीय बदलावों के कारण बढ़ा मानव-वन्यजीव संपर्क
दिकांश परमार ने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम के साथ गोवा क्षेत्र के 47 स्थानों का सर्वे किया, जिनमें अधिकतर पश्चिमी घाट के दूरस्थ वन क्षेत्र शामिल थे. उन्होंने स्थानीय एनिमल रेस्क्यू स्क्वाड की मदद भी ली, जो वर्षों से सांपों और अन्य वन्यजीवों को बचाने का काम कर रहा है. शोध से संकेत मिलता है कि आवास क्षेत्रों में बदलाव किंग कोबरा की सुरक्षा, संरक्षण प्रयासों और मानव सुरक्षा, तीनों के लिए चुनौती बन रहे हैं.
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