अंग्रेजी कैलेंडर में जहां साल के 12 महीने होते हैं, वहीं हिंदू कैलेंडर में ग्रहों की गति के हिसाब से महीनों की संख्या बदलती है। साल 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार खास रहेगा, क्योंकि इस साल मलमास या अधिकमास आएगा। इस कारण हिंदू नववर्ष में 12 की बजाय 13 महीने होंगे। मलमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान कई मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। आइए जानें, 2026 में अधिकमास कब होगा और इसके महत्व के बारे में।
Also Read: BMC चुनाव 2026: 20 साल बाद उद्धव और राज एक साथ, गठबंधन की घोषणा जल्द
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि सूर्य कैलेंडर सूर्य की गति पर। इन दोनों कैलेंडरों में समय का अंतर होने के कारण हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। साल 2026 में यही अतिरिक्त महीना जुड़ने से नया साल 13 महीनों का होगा, जिससे यह विशेष बन जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चंद्र कैलेंडर 354 दिनों का होता है, जबकि सूर्य कैलेंडर 365 दिनों का, जिससे हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बढ़ता है। इस अंतर को पाटने और ऋतुओं का संतुलन बनाए रखने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या मलमास कहा जाता है।
पुण्य की प्राप्ति का उत्तम समय अधिक मास
हिंदू पुराणों के अनुसार, पहले इस महीने को ‘मलमास’ माना जाता था और इसे अशुभ माना जाता था, क्योंकि कोई भी देवता इसका अधिपति बनने को तैयार नहीं था। जब यह महीना भगवान विष्णु के पास गया, तो उन्होंने इसे ‘पुरुषोत्तम’ नाम दिया और वरदान दिया कि इस महीने में की गई भक्ति से भक्तों को कई गुना पुण्य मिलेगा। इस महीने की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और यह 15 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, जबकि भगवान विष्णु की पूजा, जप, तप और दान-पुण्य को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस महीने की पूजा 100 दिनों के बराबर फल देती है, जिससे भक्त इसे आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम समय मानते हैं।
Also Read: Canada में भारतीय महिला की हत्या अब्दुल नामक संदिग्ध की पुलिस तलाश जारी


More Stories
नेपाल में बालेन शाह की पार्टी RSP ने दर्ज की बड़ी जीत अन्य पार्टियां काफी पीछे
IND vs NZ T20 World Cup Final: What Kind of Pitch Will Ahmedabad Offer
AIIMS जोधपुर से पढ़ाई, UPSC में टॉप कर बने मिसाल अनुज अग्निहोत्री