महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे विधान परिषद सत्र के दौरान मोबाइल पर ‘रमी’ खेलने के वीडियो को लेकर विवादों में घिर गए हैं। वीडियो को राकांपा (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग की। कोकाटे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी आरोपों को खारिज किया और कहा कि उन्हें रमी खेलना आता ही नहीं। उन्होंने दावा किया कि वह एक अनचाहा गेम हटाने की कोशिश कर रहे थे, जो स्क्रीन पर कुछ सेकंड के लिए पॉप-अप हुआ था।
मंत्री ने विपक्ष पर अधूरा वीडियो वायरल कर बदनाम करने का आरोप लगाया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना अपराध या गलती के इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है। एनसीपी नेता सुनील तटकरे ने कहा कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द कोकाटे से बात करेंगे।
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“जांच की मांग पर अड़े कोकाटे, वीडियो सही साबित होने पर इस्तीफे की पेशकश”
कोकाटे ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर गहन जांच की मांग की है। उन्होंने साफ कहा कि यदि वीडियो सही साबित हुआ, तो वे बिना किसी से मिले राज्यपाल को इस्तीफा सौंप देंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री सदन में इस पर बयान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री की नाराज़गी पर प्रतिक्रिया देते हुए कोकाटे ने कहा कि उन्होंने फडणवीस को पहले कोई जानकारी नहीं दी थी। कोकाटे ने दावा किया कि वह पिछले 25 वर्षों से विधानमंडल के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं और आगे भी करेंगे।
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विवादों और कानूनी मामलों में घिरे मंत्री माणिकराव कोकाटे की छवि पर असर
नासिक जिले के सिन्नर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री माणिकराव कोकाटे पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं। अप्रैल में उन्होंने कहा था कि किसान सरकारी योजनाओं से मिले पैसे को शादियों और सगाई में खर्च करते हैं, जिससे भारी आलोचना हुई। विवाद बढ़ने पर उन्होंने माफी मांगी और खेद जताया। इससे पहले, कोकाटे ने किसानों की तुलना भिखारियों से कर दी थी, जिस पर उन्हें तीखी आलोचना झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा था कि “भिखारी भी एक रुपया नहीं लेता, लेकिन हम एक रुपये में फसल बीमा दे रहे हैं।”
कोकाटे कानूनी मामलों में भी फंसे हैं। नासिक की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें और उनके भाई सुनील को सरकारी कोटे के फ्लैट के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करने का दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, जिला अदालत ने 5 मार्च को उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। ये मामले लगातार उनकी राजनीतिक छवि पर असर डाल रहे हैं।


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