विकसित भारत के लिए नागपुर बने ‘रोल मॉडल’
• ICTRD गोलमेज सम्मेलन में उभरे विचार
• मनपा का सतत शहर विकास की दिशा में मार्गक्रमण – महापौर श्रीमती नीता ठाकरे
• भारतीय तकनीकी अनुसंधान एवं विकास परिषद का आयोजन
नागपुर | 19 मार्च 2026
विकसित भारत के लिए नागपुर ‘रोल मॉडल’ बनेगा, ऐसा स्वर ICTRD गोलमेज सम्मेलन (ICTRD Round Table) की चर्चा में व्यक्त किया गया। भारतीय तकनीकी अनुसंधान एवं विकास परिषद (ICTRD) तथा राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘विकसित भारत की संकल्पना में नागपुर शहर का योगदान’ विषय पर गोलमेज सम्मेलन बुधवार, 18 मार्च 2026 को स्नातकोत्तर शिक्षा विभाग के सभागार में आयोजित किया गया।

इस चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने विकसित भारत के संदर्भ में अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर मार्गदर्शन करते हुए नागपुर की महापौर श्रीमती नीता ठाकरे ने कहा कि नागपुर महानगरपालिका शहर को सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों के रूप में नागपुर की महापौर श्रीमती नीता ठाकरे, पूर्व सांसद डॉ. विकास महात्मे, परिषद के समन्वयक डॉ. केतन मोहितकर, पूर्व प्र-कुलपति डॉ. गौरीशंकर पाराशर, डॉ. राजेश गाडेवार, विश्वविद्यालय की अंतरविषयी अध्ययन संकाय की अधिष्ठाता डॉ. राजश्री वैष्णव, ICTRD के चेयरमैन डॉ. आशीष ससाणकर सहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे।
महापौर श्रीमती नीता ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि ‘विकसित भारत @ 2047’ की संकल्पना को साकार करने में सभी नागरिकों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अधिकाधिक कौशलयुक्त मानव संसाधन के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्टार्टअप्स का निर्माण भी आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि शहर में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास करे और नागपुर के विकास के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे। साथ ही उन्होंने नवाचार को प्रोत्साहित करने और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में ICTRD द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
प्रस्तावना में भारतीय तकनीकी अनुसंधान एवं विकास परिषद (ICTRD) के सदस्य सचिव डॉ. केतन मोहितकर ने संस्था की बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ICTRD ने विभिन्न प्रस्तुतियों, प्रोटोटाइप्स और सहभागी मंचों के माध्यम से अब तक 1600 से अधिक नागरिकों के साथ संवाद स्थापित किया है तथा देश के 30,000 से अधिक युवाओं को क्षमता आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, स्टार्टअप और कौशल विकास के लिए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने हेतु संस्था लगातार कार्य कर रही है।
पद्मश्री डॉ. विकास महात्मे ने राष्ट्र निर्माण में व्यक्ति के विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “विकसित भारत” का निर्माण सबसे पहले “विकसित भारतीय” के निर्माण से ही संभव है। आत्म-जागरूकता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और कौशल विकास के माध्यम से प्रत्येक नागरिक राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

इस चर्चा में पूर्व प्र-कुलपति डॉ. राजेश गाडेवार, जिला कौशल सह आयुक्त श्रीमती सुनंदा बजाज, ध्रुव डायग्नोस्टिक के डॉ. शैलेंद्र मुंडडा, क्रीड़ा उपनिदेशक डॉ. पल्लवी धात्रक, एलिवेट फिटनेस एंड सुरो इंफ्रा की संस्थापक निकिता पेडगांवकर दोशी, IIM नागपुर के COO डॉ. शिवाजी धुर्वे, एडवोकेट आशीष तारवाणी, सन्तेरा उद्योग की संस्थापक आरुषी वर्मा, साइबर पुलिस के उपनिरीक्षक विवेकानंद औटी, रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय के नागपुर कैंपस प्रमुख अनुराग वाघ, मनोवैज्ञानिक तानिया बागेश्वर, पायलट पाठशाला के कैप्टन श्रीजीत आचारी, पत्रकार निशा पंजवानी, क्राउडेरा फाउंडेशन के क्षितिज इंगले, डॉ. योगेश बोंडे, डिजाइन इनसाइड के संस्थापक CA अनिकेत खापरे, सुदीप धुर्वे, संकेत काळेश्वरकर सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने नागपुर के सतत विकास के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। उनका मानना था कि यदि लॉजिस्टिक्स, परिवहन, ज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि, संस्कृति और पर्यटन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो नागपुर को विकसित शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
शैक्षणिक संस्थानों को युवाओं में कौशल विकास को बढ़ावा देते हुए नागपुर को एक वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने का भी सुझाव दिया गया। ध्रुव डायग्नोस्टिक के डॉ. शैलेंद्र मुंडडा ने बताया कि पहले कई आधुनिक चिकित्सकीय जांचों के लिए नमूने मुंबई भेजने पड़ते थे, लेकिन अब अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से नागपुर में ही गंभीर बीमारियों की जांच संभव हो रही है, जिससे नागपुर एक मेडिकल हब के रूप में उभर रहा है।
क्रीड़ा उपनिदेशक डॉ. पल्लवी धात्रक ने कहा कि नागपुर को खेल क्षेत्र में विकसित करने के लिए शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी खेल संबंधी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि ओलंपिक खेलों की मूल भावना प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाई जाए, तो नागपुर एक उत्कृष्ट खेल केंद्र बन सकता है। डॉ. शिवाजी धुर्वे ने कहा कि नागपुर में औद्योगिक विकास के लिए स्टार्टअप्स हेतु पर्याप्त निवेश और निधि उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकारी सहयोग के बिना निजी क्षेत्र का विश्वास मजबूत नहीं हो सकता, इसलिए उच्च जोखिम पूंजी (हाई-रिस्क कैपिटल) उपलब्ध कराना आवश्यक है। प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए सतत विकास की दिशा में नागपुर देश के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सकता है और आईटी क्षेत्र के विकास को भी गति देना आवश्यक है। आरुषी वर्मा ने कहा कि नागपुर की तकनीक और संस्कृति को वैश्विक स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है।
मनोवैज्ञानिक तानिया बागेश्वर ने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते समय मानसिक स्वास्थ्य को भी उतना ही महत्व देना आवश्यक है। कैप्टन श्रीजीत आचारी ने बताया कि समुद्र तल से दूर होने के कारण नागपुर के वातावरण में अधिक दृश्यता उपलब्ध होती है, जिससे यह शहर पायलट प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकता है। कृषि क्षेत्र के विकास के लिए किसानों को आयुर्वेदिक औषधीय पौधों की खेती की ओर बढ़ना चाहिए, ऐसा सुझाव डॉ. योगेश बोंडे ने दिया।
कार्यक्रम का संचालन सिद्धार्थ रॉय ने किया तथा आभार प्रदर्शन संयोजक डॉ. केतन मोहितकर ने किया। कार्यक्रम की सफलता के लिए भारतीय तकनीकी अनुसंधान एवं विकास परिषद के सदस्यों ने सहयोग प्रदान किया।



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