ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में 34 साल लंबे वामपंथी शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की थी। साल 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद कई लोगों ने उनके प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाए थे। हालांकि, समय के साथ उन्होंने इन सभी शंकाओं का जवाब अपने काम और चुनावी जीत से दिया। लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत साबित की। अब 2026 के चुनाव में वह चौथी बार जीत दर्ज करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर रही हैं।
अगर ममता बनर्जी इस बार भी जीत हासिल करती हैं, तो वह लगातार चार बार चुनाव जीतने वाली पहली मुख्यमंत्री बन सकती हैं। लेकिन यह चुनाव उनके लिए अब तक की सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। बदलते राजनीतिक समीकरण और बढ़ती चुनौतियां उनके सामने बड़ी बाधा बन सकती हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि वह इन चुनौतियों का सामना कैसे करती हैं। चुनाव का परिणाम उनके राजनीतिक भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।
इस बार चुनाव प्रक्रिया भी पिछले चुनावों से अलग है। जहां 2021 में आठ चरणों में मतदान हुआ था, वहीं 2026 में केवल दो चरणों में चुनाव होंगे। राज्य में मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मुकाबला और भी तीखा होगा। ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव बीजेपी को रोकने की बड़ी चुनौती बन चुका है।
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कड़ी चुनौतियों के बीच ममता बनर्जी की चौथी जीत की परीक्षा
ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता विरोधी लहर है। लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों पर उनसे जवाब मांगा जा रहा है। इसके अलावा मतदाता सूची में बदलाव भी बड़ा विवाद बन गया है। लाखों वोटरों के नाम हटाए जाने और कई नामों की जांच जारी रहने से राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह मुद्दा चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
तृणमूल कांग्रेस पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। पीडीएस घोटाला, शिक्षक भर्ती मामला और अन्य विवाद चुनावी बहस का हिस्सा बने हुए हैं। खासकर शहरी इलाकों में इन मुद्दों का असर देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही कुछ वादों को पूरा न कर पाने को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। सांप्रदायिक मुद्दों और कानूनों को लेकर भी विपक्ष उन्हें घेरने की कोशिश कर रहा है।
इन चुनौतियों के बीच ममता बनर्जी ने कई लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा की है। उन्होंने महिलाओं, युवाओं, कर्मचारियों और धार्मिक वर्गों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहायता बढ़ाई है। लक्ष्मी भंडार और युवा योजनाओं में बढ़ोतरी जैसे कदम उठाए गए हैं। हालांकि, लोग इन घोषणाओं को चुनावी रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। इसके बावजूद ममता बनर्जी का राजनीतिक प्रभाव अभी भी मजबूत बना हुआ है और वह अन्य दलों पर बढ़त बनाए हुए हैं।
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