अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल से कई देशों पर जवाबी आयात शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाने की घोषणा करने वाले हैं. उन्होंने इस दिन को विशेष रूप से “लिबरेशन डे” यानी “आजादी दिवस” का नाम दिया है. हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक स्तर पर एक व्यापार युद्ध की शुरुआत हो सकता है.
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ट्रंप का टैरिफ प्लान: जितना टैक्स, उतना जवाबी शुल्क
खुद अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, वह उन सभी देशों पर जवाबी टैरिफ का एलान करने वाले हैं, जो देश अमेरिकी उत्पादों के आयात पर शुल्क वसूलते हैं. ट्रंप का साफ कहना है कि वह हर देश पर उतना ही टैरिफ लगाएंगे, जितना सामने वाला देश अमेरिका के उत्पादों पर लगाता है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के आयात शुल्क हर देश में उद्योग दर उद्योग या उत्पाद दर उत्पाद पर निर्भर होंगे. यानी जो उद्योग ज्यादा आयात शुल्क लगाएगा, उसे उतना ही जवाबी टैरिफ झेलना होगा. यानी एक ही देश के अलग-अलग उद्योगों पर अलग-अलग टैरिफ की व्यवस्था की जा सकती है.
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औसत टैरिफ मॉडल: ट्रंप प्रशासन हर साल जुटा सकता है 600 अरब डॉलर
ट्रंप प्रशासन के एक और वर्ग का कहना है कि अलग-अलग देशों पर यह टैरिफ औसत के आधार पर भी लगाए जा सकते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर कोई देश अमेरिकी कारों पर 30% टैरिफ लगाता है और फार्मा सेक्टर पर 20% टैरिफ लगाता है, तो ट्रंप प्रशासन पूरे देश के उत्पादों पर जवाबी औसतन टैरिफ 25 फीसदी कर सकता है. व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने रविवार को ही फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका इन टैरिफ से हर साल 600 अरब डॉलर जुटा सकता है, जिसका मतलब है कि सभी देशों पर आयात शुल्क का औसत करीब 20 फीसदी रहेगा.
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ट्रंप के टैरिफ निशाने पर कौन? ‘डर्टी 15’ का जिक्र बढ़ा संशय
ट्रंप ने अब तक कई देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है. सबसे पहले उनके निशाने पर चीन, कनाडा और मैक्सिको रहे थे. इसके बाद उन्होंने कई मौकों पर अपने बाकी सहयोगियों- यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया, भारत, ब्राजील, आदि के नाम लिए थे. अपने सबसे ताजा बयान में ट्रंप ने कहा- “हम सभी देशों से शुरुआत करना चाहेंगे. देखते हैं आगे क्या होता है. उनके इस बयान के बाद यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप 2 अप्रैल को पुख्ता तौर पर किन-किन देशों को टैरिफ की जद में ला सकते हैं. हालांकि, अमेरिका के वाणिज्य मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपने एक बयान में ‘डर्टी 15’ का जिक्र किया.
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