यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम 6 मार्च को जारी हुआ। रिजल्ट आने के बाद देशभर में सफल उम्मीदवारों के घरों में जश्न का माहौल देखने को मिला। लेकिन इस बार जश्न के साथ-साथ फर्जी दावों की खबरों ने भी ध्यान खींचा। अब तक चार ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोगों ने गलत तरीके से अपने चयन का दावा किया।
पहला मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से सामने आया। यहां शिखा गौतम नाम की एक युवती ने दावा किया कि उसने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 113 हासिल की है। इस दावे के बाद परिवार और रिश्तेदारों ने मिठाइयां बांटीं और जश्न मनाया। जब शिखा बुलंदशहर पहुंचीं तो स्थानीय लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत भी किया।
बाद में जांच में पता चला कि 113वीं रैंक दिल्ली में रहने वाली दूसरी शिखा को मिली है। इस मामले को लेकर स्पष्टीकरण की मांग करते हुए UPSC को ई-मेल भी भेजा गया। इसके बाद आयोग ने बुलंदशहर की जिलाधिकारी को मामले की जांच के निर्देश दिए। जांच में बुलंदशहर की शिखा गौतम का दावा झूठा पाया गया।
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जश्न के बीच सामने आए फर्जी दावे, प्रशासन और UPSC ने शुरू की जांच।
दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से सामने आया। गौरा खास गांव में प्रियंका चौधरी के घर पर भी रिजल्ट के बाद जश्न मनाया गया। परिवार ने दावा किया कि प्रियंका ने यूपीएससी परीक्षा में 79वीं रैंक हासिल की है। हालांकि जांच के बाद पता चला कि यह रैंक हिमाचल प्रदेश के चंबा की रहने वाली प्रियंका चौधरी की है।
हिमाचल प्रदेश की प्रियंका चौधरी ने अपने चौथे प्रयास में यह सफलता हासिल की थी। वहीं गाजीपुर की प्रियंका चौधरी वर्तमान में प्रयागराज में जीएसटी इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। जांच के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गाजीपुर की प्रियंका का यूपीएससी चयन से कोई संबंध नहीं है।
तीसरा मामला आकांक्षा सिंह नाम को लेकर सामने आया। यूपीएससी रिजल्ट में 301वीं रैंक पर दो अलग-अलग उम्मीदवारों ने दावा किया। एक उम्मीदवार उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की थीं, जबकि दूसरी बिहार के आरा की रहने वाली थीं। दोनों दावों के कारण भ्रम की स्थिति बन गई।
बाद में UPSC ने आधिकारिक जानकारी जारी कर स्पष्ट किया कि 301वीं रैंक गाजीपुर की आकांक्षा सिंह को मिली है। चौथा मामला बिहार के शेखपुरा से सामने आया, जहां रंजीत कुमार नाम के युवक ने खुद को AIR 440 का उम्मीदवार बताया। बाद में जांच में पता चला कि यह रैंक कर्नाटक के रंजीथ कुमार की है। दस्तावेज मांगे जाने के बाद आरोपी रंजीत फरार हो गया और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
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