Tukaram Mundhe IAS: महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों अपनी सख्त कार्यशैली और लगातार छापेमारी के कारण सुर्खियों में हैं। मिलावटी और खराब खाद्य पदार्थों के खिलाफ उनकी कार्रवाई से राज्य के बड़े होटल, रेस्टोरेंट और फूड कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। हाल ही में मुंबई हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उनकी टीम ने हाईकोर्ट परिसर की कैंटीन की भी जांच की, जिससे उनका नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया।
मुंढे ने मई 2026 में FDA कमिश्नर का पद संभालने के कुछ ही दिनों बाद राज्यभर में बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। दो महीनों के भीतर विभाग ने 1,100 से अधिक छापे मारे, 56 होटल और प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस रद्द किए और करोड़ों रुपये के खराब एवं मिलावटी खाद्य पदार्थ जब्त किए।
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किसान परिवार से IAS बनने तक का सफर
तुकाराम मुंढे 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं और महाराष्ट्र के बीड जिले के एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। बचपन में उन्होंने अपने पिता के साथ खेतों में काम किया और सब्जियां बेचने में भी मदद की। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और प्रशासनिक सेवा में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी छवि एक ईमानदार, अनुशासित और बिना किसी दबाव के फैसले लेने वाले अधिकारी की रही है।
करीब 20 वर्षों के प्रशासनिक करियर में उनका लगभग 25 बार तबादला हो चुका है। हालांकि, लगातार ट्रांसफर के बावजूद उन्होंने अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं किया। यही वजह है कि आम लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बनी रही, जबकि कई बार उनकी सख्त कार्यप्रणाली राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय भी बनी।
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FDA में सख्ती, हाईकोर्ट की कैंटीन तक पहुंची जांच
FDA की कार्रवाई के दौरान कई बड़े होटल और रेस्टोरेंट जांच के दायरे में आए। नवी मुंबई के एक फाइव स्टार होटल का लाइसेंस रद्द होने के बाद मामला मुंबई हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA से सवाल किया कि कार्रवाई केवल निजी प्रतिष्ठानों तक सीमित क्यों है। कोर्ट ने मंत्रालय, सरकारी कार्यालयों और हाईकोर्ट की कैंटीनों की भी जांच करने का निर्देश दिया।
इसी बीच विभाग के कुछ कर्मचारियों ने भी उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। छत्रपति संभाजीनगर स्थित FDA लैब के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि स्टाफ की कमी के बावजूद लैब को दो शिफ्ट में देर रात तक संचालित किया जा रहा है। जिससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर मुंढे के समर्थकों का कहना है कि उनकी सख्त कार्यशैली ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाया है।
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