पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी अब अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को एकजुट रखने में संघर्ष कर रही हैं। पहले सांसद रिताब्रता बनर्जी ने कई नेताओं के समर्थन से विपक्षी नेतृत्व का दावा पेश किया था। अब सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी पार्टी से दूरी बनाकर नया राजनीतिक संदेश दे दिया है। लगातार बढ़ती बगावत ने TMC नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ाईं और बंगाल राजनीति में हलचल तेज कर दी।
काकोली घोष के बयान से बढ़ी TMC की मुश्किलें
बारासात सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। उन्होंने सार्वजनिक बयान देते हुए कहा कि बागी सांसद NDA को समर्थन देने का फैसला कर चुके हैं। काकोली घोष ने दावा किया कि लगभग उन्नीस सांसद उनके समर्थन में लगातार खड़े दिखाई दे रहे हैं। दल-बदल कानून से बचने के लिए बागियों को दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जुटाना जरूरी माना जा रहा है। उनके बयान ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहराते असंतोष और नेतृत्व संकट को खुलकर सामने ला दिया।
दिल्ली में सोमवार को कई बागी सांसदों ने अलग रणनीति बनाने के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज किया। दूसरी तरफ ममता बनर्जी INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होकर विपक्षी एकता मजबूत करने की कोशिश करती रहीं। उसी समय काकोली घोष के नेतृत्व में बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की। बाद में यह समूह बीरभूम सांसद शताब्दी रॉय के घर पहुंचा और आगे की रणनीति पर चर्चा की।
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बागी सांसदों की बैठकों से बंगाल की राजनीति गरमाई
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने फर्जी सूची जारी करके राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश जानबूझकर की है। कीर्ति आजाद ने दावा किया कि कई सांसदों ने किसी दस्तावेज या पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया। उन्होंने ऑपरेशन लोटस को असफल बताते हुए अमित शाह की रणनीति पर भी खुलकर राजनीतिक तंज कसा था। उनके बयान के बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया तथा आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हुआ।
राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे ने भी तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी संकट को और गहरा बना दिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार और अराजक शासन चलाने जैसे गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी दोनों बैठकों में मौजूद रहकर बागी सांसदों को राजनीतिक समर्थन दे रहे थे। एक सांसद ने दावा किया कि वरिष्ठ नेताओं ने अनुभवी सांसदों के साथ लंबे समय से खराब व्यवहार किया है। लगातार बढ़ती नाराजगी ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक चुनौतियों को और गंभीर बना दिया।


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