तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने शपथ लेते ही कई बड़े फैसलों की घोषणा कर दी। उन्होंने दो महीने में 500 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल करने वाले परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही सरकार ने हर जिले में ड्रग्स के खिलाफ विशेष बल बनाने और महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘लायन वुमन टास्क फोर्स’ शुरू करने की घोषणा की। विजय ने अपने पहले संबोधन में पिछली डीएमके सरकार पर राज्य की वित्तीय स्थिति खराब करने का आरोप लगाया। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया।
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लंबे वादों के बाद क्या विजय मुश्किल में
पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने विजय के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि डीएमके सरकार ने पहले ही बजट में तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने विजय पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार के पास योजनाएं चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। स्टालिन ने दावा किया कि उनकी सरकार ने कोविड, बाढ़ और केंद्र सरकार से जुड़े वित्तीय दबावों के बावजूद कई कल्याणकारी योजनाएं सफलतापूर्वक लागू कीं। उन्होंने यह भी कहा कि केवल “खजाना खाली” कहने से वास्तविक आर्थिक स्थिति नहीं बदलती।
अर्थशास्त्रियों ने भी विजय के बयान पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञ कृष्णमूर्ति प्रभाकरण ने कहा कि तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति को “खजाना खाली” बताना सही नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य का कर्ज तय सीमा के भीतर है और उसका प्रबंधन अभी नियंत्रण में है। हालांकि बढ़ते ब्याज भुगतान, बिजली बोर्ड के घाटे, वेतन और पेंशन जैसी चुनौतियां सरकार पर दबाव जरूर बना रही हैं। इसके बावजूद राज्य की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है और बजट प्रक्रिया के तहत सभी खर्च नियंत्रित तरीके से किए जाते हैं।
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तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था पर सियासी घमासान
मद्रास विश्वविद्यालय के पूर्व अर्थशास्त्र विभाग प्रमुख ज्योति शिवज्ञानम ने कहा कि किसी भी राज्य की वित्तीय व्यवस्था विधानसभा की मंजूरी और बजट प्रक्रिया पर आधारित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बिना मंजूरी के कोई खर्च नहीं कर सकती और बाद में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक इन खातों का ऑडिट भी करता है। उनके अनुसार तमिलनाडु का कर्ज बढ़ा जरूर है, लेकिन राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार भी तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से कर्ज और सकल राज्य घरेलू उत्पाद का अनुपात अभी भी नियंत्रित सीमा में बना हुआ है।
तमिलनाडु सरकार के अंतरिम बजट के मुताबिक राज्य का कुल कर्ज 10.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं सरकार ने अगले वित्त वर्ष में 1.79 लाख करोड़ रुपये उधार लेने और 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक चुकाने की योजना बनाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य की विकास दर और आर्थिक क्षमता को देखते हुए यह स्थिति अभी गंभीर संकट नहीं मानी जा सकती। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई बड़े देश और राज्य विकास योजनाओं के लिए लगातार कर्ज लेते हैं। इसलिए केवल कुल कर्ज को देखकर आर्थिक संकट का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
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