रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी
सूर्यकांत ने गुरुवार (26 फरवरी 2026) को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा मामलों की सूचीबद्धता के तरीके पर गंभीर चिंता जताई और व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वह अपने कार्यकाल में रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं कर पाए, तो इसे अपने कर्तव्य के निर्वहन में गंभीर कमी मानेंगे। उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी की। सीजेआई ने सीधे सवाल किया कि जब समान प्रकृति का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंच में लंबित है, तो उसी मुद्दे को उनकी बेंच के समक्ष किस आधार पर सूचीबद्ध किया गया।
सीजेआई ने जोर देकर कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष सूचीबद्धता न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता की आधारशिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एक जैसे मामलों को अलग-अलग पीठों के समक्ष रखा जाएगा, तो न्यायिक प्रक्रिया में भ्रम और अनावश्यक जटिलताएं बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री केवल प्रशासनिक इकाई नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए किसी भी प्रकार की मनमानी या असंगत प्रक्रिया को अदालत स्वीकार नहीं करेगी।
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लिस्टिंग नियमों की समीक्षा के संकेत, अगली सुनवाई 25 मार्च को
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की। सोलंकी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की अन्य पीठें पहले ही इसी आधार पर ऐसी याचिकाएं खारिज कर चुकी हैं। इसी मुद्दे पर सिराज अहमद खान की याचिका फिलहाल जस्टिस जे.बी. परडीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ के समक्ष लंबित है। सीजेआई ने कहा कि कुछ अधिकारी खुद को स्थायी और न्यायाधीशों को अस्थायी मानते हैं, जो पूरी तरह अनुचित सोच है। शोएब आलम ने आग्रह किया कि अदालत इरफान सोलंकी की याचिका को सिराज अहमद खान की याचिका के साथ जोड़े।
वहीं एएसजी नटराज ने अदालत को अवगत कराया कि पूर्व सीजेआई D. Y. Chandrachud की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ और जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली अन्य पीठ पहले ही हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर चुकी हैं, जिनमें यूपी गैंगस्टर एक्ट को समान आधार पर चुनौती दी गई थी।
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