सुप्रीम कोर्ट ने RPSC SI भर्ती परीक्षा मामले में अपना पूर्व आदेश संशोधित करते हुए बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब राहत केवल मूल याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा तक सीमित रहेगी। इस फैसले से पहले बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद थी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश में महत्वपूर्ण बदलाव किया। अदालत ने पहले दिए गए आदेश के कुछ हिस्सों को हटाते हुए दायरा सीमित कर दिया। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों को झटका लगा है, जो पहले राहत के दायरे में आते थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य उम्मीदवारों को स्वतः इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा। इस संशोधन के बाद परीक्षा से जुड़े पूरे मामले की दिशा बदल गई है।
Also Read: कीटनाशकों का संकट: ईरान युद्ध से किसानों पर बढ़ता असर
RPSC SI परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट का संशोधित आदेश, राहत सिर्फ याचिकाकर्ता तक सीमित
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश के पैरा 5 और 6 को हटाने का निर्णय लिया। इन पैरा में याचिकाकर्ता जैसे अन्य उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने पहले लगभग लाखों उम्मीदवारों को अस्थायी रूप से परीक्षा में शामिल होने की छूट दी थी। यह आदेश सूरज मल मीणा की याचिका पर दिया गया था, जिसमें परीक्षा टालने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि वह निर्धारित समय पर परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे। कोर्ट ने उस समय सभी समान परिस्थितियों वाले उम्मीदवारों को राहत देने का फैसला किया था। लेकिन अब संशोधित आदेश के बाद यह राहत केवल एक व्यक्ति तक सीमित कर दी गई है। इससे पहले शामिल होने की उम्मीद रखने वाले उम्मीदवारों में निराशा देखी जा रही है।
राजस्थान लोक सेवा आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आदेश में बदलाव की मांग की। आयोग ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल कराना संभव नहीं है। आयोग ने प्रशासनिक और व्यवस्थागत कठिनाइयों का हवाला देते हुए राहत सीमित करने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की दलीलों को ध्यान में रखते हुए आदेश में संशोधन किया। विशेष पीठ ने माना कि सभी उम्मीदवारों को शामिल करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने राहत केवल मूल याचिकाकर्ता तक सीमित रखने का निर्णय लिया। इस फैसले से आयोग को राहत मिली है, जबकि अन्य उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है। यह बदलाव परीक्षा प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक बताया गया।
Also Read: देश की टॉप एजुकेशन सिटी बना सीकर, प्रिंस हब से सबसे ज्यादा टॉपर्स
आदेश में बदलाव से हजारों उम्मीदवारों को झटका
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि अन्य उम्मीदवारों ने समान राहत के लिए याचिका दायर नहीं की थी। अदालत ने कहा कि केवल सूरज मल मीणा ने ही समय रहते न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इसी आधार पर कोर्ट ने राहत को व्यक्तिगत स्तर तक सीमित रखने का निर्णय लिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य उम्मीदवारों के अधिकार पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अदालत ने उन्हें भविष्य में उचित मंच पर याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी है। यह स्पष्ट किया गया कि हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद स्थिति बदल सकती है। इस टिप्पणी से अन्य उम्मीदवारों के लिए कानूनी रास्ता अभी खुला हुआ है। कोर्ट ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखा।
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने परीक्षा से जुड़े विवाद को नई दिशा दी है। हजारों उम्मीदवार अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। राजस्थान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले का अब सभी को इंतजार रहेगा। यदि हाई कोर्ट कोई नया निर्देश देता है, तो स्थिति फिर बदल सकती है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट का संशोधित आदेश ही प्रभावी रहेगा और उसी के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि अदालतें व्यक्तिगत याचिकाओं के आधार पर ही राहत देती हैं। इससे भविष्य में अन्य उम्मीदवारों को समय रहते कानूनी कदम उठाने का संदेश मिला है। यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण की ओर बढ़ चुका है।
Also Read: कीटनाशकों का संकट: ईरान युद्ध से किसानों पर बढ़ता असर


More Stories
आशीष कुमार डैश होंगे इन्फोसिस के नए CEO और MD, 1 अप्रैल 2027 से संभालेंगे जिम्मेदारी
Gujarat on Red Alert as Ahmedabad Receives 177 mm Rainfall in Just Two Hours
Rupee slips 4 paise to settle at 96.57 against U.S. dollar