पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद बीजेपी ने साफ कर दिया है कि अगर उसकी सरकार बनती है तो राज्य का संचालन ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग से किया जाएगा। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने घोषणा की कि सरकार फिर से उसी भवन में लौटेगी, जो कभी बंगाल और ब्रिटिश शासन के दौरान सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र था। सोशल मीडिया पर इस फैसले को “नीली इमारत से लाल इमारत की वापसी” कहा जा रहा है। दरअसल मौजूदा सचिवालय नवान्न सफेद और नीले रंग की इमारत है, जबकि राइटर्स बिल्डिंग लाल रंग की पहचान रखती है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को प्रतीकात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। वर्ष 2011 में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सचिवालय को राइटर्स बिल्डिंग से हटाकर हावड़ा स्थित नवान्न में शिफ्ट कर दिया था।
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राइटर्स बिल्डिंग से सरकार चलाने की तैयारी
सरकार ने उस समय तर्क दिया था कि राइटर्स बिल्डिंग काफी पुरानी हो चुकी है और उसे बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत है। इसके बाद कई सरकारी विभाग नवान्न में स्थानांतरित कर दिए गए। पिछले 13 वर्षों में ममता बनर्जी ने कभी यह संकेत नहीं दिया कि वह दोबारा राइटर्स बिल्डिंग लौटना चाहती हैं। हालांकि भवन के जीर्णोद्धार का काम लगातार जारी रहा, लेकिन अब तक पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। राइटर्स बिल्डिंग का इतिहास ब्रिटिश शासन से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1777 में ब्रिटिश वास्तुकार थॉमस लियोन ने ईस्ट इंडिया कंपनी के जूनियर कर्मचारियों के लिए इस इमारत का डिजाइन तैयार किया था। उस समय कंपनी अपने प्रशासनिक और कर संग्रह के काम को एक जगह से संचालित करना चाहती थी। हाथ से सरकारी दस्तावेज तैयार करने वाले कर्मचारियों को “राइटर” कहा जाता था, इसलिए इस भवन का नाम राइटर्स बिल्डिंग पड़ा।
बाद में यह इमारत बंगाल प्रशासन और ब्रिटिश सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र बन गई। समय के साथ इसमें ग्रीक और रोमन स्थापत्य शैली की झलक भी जोड़ी गई। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का भी अहम हिस्सा रही है। वर्ष 1930 में क्रांतिकारी विनय बसु, बादल गुप्त और दिनेश गुप्त ने इसी भवन पर हमला किया था। तीनों ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी एनएस सिम्पसन की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसे भारतीय कैदियों पर अत्याचार के लिए जाना जाता था। इसके बाद भवन के भीतर लंबे समय तक गोलीबारी हुई। यह घटना इस बात का प्रतीक बन गई कि राइटर्स बिल्डिंग केवल प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि सत्ता का केंद्र थी। आज भी भवन के सामने विनय, बादल और दिनेश की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
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