मध्य प्रदेश के चर्चित सौरभ शर्मा मामले में बड़ा कानूनी अपडेट सामने आया है। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। करीब 18 महीने तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद अदालत ने उन्हें राहत प्रदान की। कोर्ट ने माना कि लंबे समय से ट्रायल लंबित है और सुनवाई पूरी होने में अभी समय लग सकता है। हालांकि, इस मामले की जांच अभी भी लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग द्वारा जारी है। जांच एजेंसियां सौरभ शर्मा की कथित संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं।
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18 महीने बाद हाई कोर्ट से मिली जमानत
हाई कोर्ट के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद सौरभ शर्मा की जमानत याचिका स्वीकार की। अदालत ने 31 जुलाई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था और बाद में अपना आदेश जारी किया। सौरभ शर्मा को यह राहत तीसरे प्रयास में मिली है। इससे पहले जिला अदालत और हाई कोर्ट उनकी नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर चुके थे। पत्नी की बीमारी का हवाला देकर मांगी गई अंतरिम जमानत भी अदालत ने स्वीकार नहीं की थी। इस बार लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में हो रही देरी को आधार बनाकर दाखिल की गई नई याचिका पर कोर्ट ने सकारात्मक फैसला सुनाया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में कड़ा विरोध दर्ज कराया। एजेंसी ने दलील दी कि यह गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है और आरोपी ने कथित रूप से अपराध से अर्जित संपत्ति को विभिन्न कंपनियों, रिश्तेदारों और सहयोगियों के माध्यम से छिपाने की कोशिश की। ED ने यह भी आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और जांच से जुड़े अहम सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। इन तर्कों के समर्थन में एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया, लेकिन अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सशर्त जमानत देने का फैसला किया।
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सख्त शर्तों के साथ मिली रिहाई
हाई कोर्ट ने सौरभ शर्मा को 10 लाख रुपये के निजी मुचलके और 10 लाख रुपये की स्थानीय जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे और न ही किसी प्रकार से सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेंगे। इसके अलावा उन्हें ट्रायल कोर्ट में हर सुनवाई के दौरान उपस्थित रहना होगा। कोर्ट ने बिना अनुमति विदेश यात्रा करने पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने साफ किया कि इन शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है और आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सौरभ शर्मा परिवहन विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के तहत आरक्षक बने थे और कुछ वर्षों की सेवा के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। दिसंबर 2024 में भोपाल के अरेरा कॉलोनी स्थित उनके ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी के बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। इसके अगले दिन भोपाल के मेंडोरा क्षेत्र में खड़ी एक लावारिस इनोवा कार से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसके अलावा जांच एजेंसियों ने 200 किलो से अधिक चांदी और अन्य मूल्यवान संपत्तियां मिलने का भी दावा किया था। फिलहाल लोकायुक्त, आयकर विभाग और ED इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और कथित अवैध संपत्ति तथा वित्तीय नेटवर्क से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल जारी है।
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