रवि गोपाल की पत्नी ऋतु गौतम ने बताया कि 18 मार्च की रात करीब 9:22 बजे उनकी पति से वीडियो कॉल पर बात हो रही थी। बातचीत के दौरान सब सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक कॉल कट गया। ऋतु ने कई बार दोबारा फ़ोन मिलाने की कोशिश की, मगर संपर्क नहीं हो सका। रात भर उन्हें यही लगा कि शायद नेटवर्क की दिक्कत रही होगी। सुबह किसी का फ़ोन आया और उसने किसी बड़ी घटना की जानकारी दी, लेकिन पहले उन्हें इस पर भरोसा नहीं हुआ। कुछ देर बाद रियाद में रहने वाले उनके छोटे भाई ने फ़ोन कर साफ़ शब्दों में बताया कि रवि अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह सुनते ही ऋतु की दुनिया जैसे थम गई।
ऋतु गौतम ने रोते हुए कहा कि उनकी शादी रवि गोपाल से करीब छह साल पहले हुई थी और उनका एक छोटा बच्चा भी है। उन्होंने बताया कि रवि का सपना था कि वह परिवार को बेहतर ज़िंदगी दें और अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाएं। सीतापुर के बघाइन गांव में उनका आधा पक्का और आधा कच्चा घर इस संघर्ष की कहानी खुद बयां करता है। ऋतु ने कहा कि पति की मौत के बाद उनका पूरा सहारा छिन गया है। गांव की महिलाओं के बीच बैठी उन्होंने कहा, “मेरी दुनिया उजड़ गई।” अब उनके सामने बच्चे का भविष्य, घर की जिम्मेदारी और रोज़मर्रा की परेशानियां एक साथ खड़ी हैं। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है।
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पत्नी की आखिरी कॉल के बाद आई मौत की खबर
रवि गोपाल पिछले साढ़े तीन साल से सऊदी अरब की राजधानी रियाद में काम कर रहे थे। उनके भाई मनमोहन दयाल ने बताया कि रवि पहले खेती करते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गए थे। पिछले साल जुलाई में वह बहन की शादी में घर आए थे, जहां परिवार पर कर्ज़ भी चढ़ गया था। सितंबर 2025 में वह दूसरी बार कमाने के लिए रियाद लौटे थे। मनमोहन ने बताया कि घटना वाले दिन उन्हें रवि के एक दोस्त का फ़ोन आया, जिसने कहा कि फैक्ट्री के पास मिसाइल गिरी है और रवि की मौत हो गई है। पहले उन्हें इस बात पर यक़ीन नहीं हुआ, लेकिन बाद में रियाद में मौजूद रिश्तेदारों और सहकर्मियों ने इस खबर की पुष्टि कर दी। परिवार को तभी समझ आया कि अब रवि कभी वापस नहीं आएंगे।
परिवार और सहकर्मियों के मुताबिक, जिस फैक्ट्री में रवि काम कर रहे थे, उसके पास मिसाइल हमला हुआ था। धमाके की वजह से फैक्ट्री की दीवार गिर गई और रवि मलबे में दब गए। उनके साथ काम करने वाले लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रवि के सहकर्मी राम निवास ने शव की पहचान की। मनमोहन ने बताया कि युद्ध जैसे हालात शुरू होने के बाद रवि से कई बार बात हुई थी और उन्होंने बताया था कि आसपास मिसाइलें गिर रही हैं। परिवार ने उन्हें भारत लौट आने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने बताया कि उड़ानें बंद हैं और टिकट भी बहुत महंगे हो चुके हैं। आखिरकार वही डर सच साबित हुआ, जिससे परिवार कई दिनों से घबराया हुआ था।
पत्नी ने बताया कैसे टूटा परिवार का सहारा
भारतीय दूतावास ने रवि गोपाल की मौत पर दुख जताते हुए घटना की पुष्टि की। विदेश मंत्रालय ने बताया कि रियाद हमले में एक भारतीय नागरिक की जान गई और पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन से समन्वय किया। 25 मार्च को रवि गोपाल का शव लखनऊ पहुंच गया। मंत्रालय ने यह भी कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच अब तक छह भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है।
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