मराठा साम्राज्य की शान और पेशवाओं की सत्ता का प्रतीक ऐतिहासिक Shaniwar Wada में गुरुवार को अचानक आग लगने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किले के परिसर से धुआं उठता देख वहां मौजूद पर्यटक और कर्मचारी घबरा गए। यह स्थान मराठा इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है, इसलिए आग की खबर फैलते ही लोगों में चिंता बढ़ गई कि कहीं इस ऐतिहासिक स्मारक को नुकसान न पहुंच जाए। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय रहते कार्रवाई कर आग को काबू में कर लिया गया और बड़ा हादसा टल गया।
मिली जानकारी के अनुसार, किले की प्राचीर और दीवारों के भीतर काफी समय से सूखे पत्ते और कचरा जमा हो गया था। दोपहर के समय इन्हीं सूखे पत्तों के ढेर में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग तेजी से फैलने लगी और पूरे परिसर में काले धुएं का गुबार छा गया। धुआं फैलते ही वहां मौजूद पर्यटकों में घबराहट फैल गई और कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
घटना की सूचना मिलते ही पुणे अग्निशमन विभाग तुरंत हरकत में आ गया। दमकल विभाग की कई गाड़ियां और जवान मौके पर पहुंचे और उन्होंने तुरंत आग बुझाने का काम शुरू कर दिया। दमकल कर्मियों ने तेजी से घेराबंदी करते हुए आग को फैलने से रोका और कुछ ही समय में उस पर पूरी तरह काबू पा लिया। उनकी त्वरित कार्रवाई की वजह से आग किले के मुख्य ढांचे तक नहीं पहुंच सकी।
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समय रहते आग पर काबू, बड़ा नुकसान टला
दमकल कर्मियों की सतर्कता और तेज कार्रवाई ने एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। अगर आग कुछ और समय तक जलती रहती, तो यह ऐतिहासिक इमारत के महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती थी। लेकिन समय रहते आग बुझा देने से किले की संरचना और उसकी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रही। इस घटना के बाद अधिकारियों ने परिसर की स्थिति का भी जायजा लिया।
बाजीराव और मस्तानी की यादों से जुड़ा यह ऐतिहासिक वाड़ा पुणे और पूरे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में पर्यटक इतिहास की झलक देखने आते हैं। घटना के समय भी परिसर में कई पर्यटक मौजूद थे, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हालांकि किसी भी पर्यटक या कर्मचारी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
सूखे पत्तों और कचरे में लगी यह आग ऐतिहासिक स्मारकों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों पर नियमित सफाई और निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। फिलहाल राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और इस ऐतिहासिक धरोहर को कोई बड़ा भौतिक नुकसान नहीं पहुंचा।
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