सिंधुदुर्ग ज़िले के राजकोट क़िले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने के बाद राजनीतिक स्थिति में उत्तेजना बढ़ गई है। आज इसी क़िले पर बीजेपी नेता नारायण राणे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई।
सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी दोनों के बीच प्रतिमा को लेकर तीखी खींचतान देखने को मिल रही है, और इस बार कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाज़ी की है।
इस घटना के संदर्भ में, महा विकास अघाड़ी ने रविवार, 1 सितंबर को मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया के पास शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
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उप-मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर विवाद के बाद मांगी माफ़ी
इसी बीच, बुधवार को महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ने प्रतिमा गिरने के लिए माफ़ी मांगी। लातूर ज़िले में एक जनसभा के दौरान उन्होंने कहा कि वे ‘महाराष्ट्र की 13 करोड़ जनता से माफ़ी मांगते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे देवता हैं, और उनकी प्रतिमा का इस तरह गिरना हमारे लिए एक बड़ा झटका है।’
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मूर्ति नहीं, गौरव गिरा है
पुलिस ने दोनों गुटों से बातचीत कर हंगामा रोकने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुई। शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने नीलेश राणे से मध्यस्थता के लिए चर्चा की। पत्रकारों से बात करते हुए, जयंत पाटिल ने कहा, “राजकोट क़िले पर छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति केवल आठ महीने में गिरी है। यह मूर्ति नहीं, बल्कि महाराष्ट्र का गौरव गिरा है।”
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