June 26, 2026

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विश्वास नांगरे पाटिल के आरएसएस कार्यक्रम पर कांग्रेस का हमला

नागपुर के नवनियुक्त पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ और उसके संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की खुलकर सराहना की। उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नया विवाद शुरू हो गया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले पर स्पष्ट जवाब मांगा। पार्टी ने आरोप लगाया कि एक संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को राजनीतिक तटस्थता बनाए रखनी चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि किसी विशेष वैचारिक संगठन के मंच से सार्वजनिक प्रशंसा कई गंभीर सवाल खड़े करती है। पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। कांग्रेस ने सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग भी रखी।


सबसे पहले सरकारी अनुमति को लेकर गंभीर सवाल उठाया। पार्टी ने ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968 के नियम 13(2)(f)(iii) का हवाला दिया। कांग्रेस ने पूछा कि क्या विश्वास नांगरे पाटिल ने कार्यक्रम में शामिल होने से पहले सरकार से अनुमति ली थी। पार्टी ने कहा कि नियमों के अनुसार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए आवश्यक स्वीकृति लेनी पड़ती है।

कांग्रेस ने सरकार से अनुमति पत्र सार्वजनिक करने की मांग भी की। पार्टी ने पूछा कि यदि अनुमति नहीं ली गई तो सरकार क्या कार्रवाई करेगी। कांग्रेस ने कहा कि सेवा नियम सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि नियमों के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इस सवाल का स्पष्ट उत्तर देने की मांग दोहराई।

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राजनीतिक तटस्थता पर घिरे विश्वास नांगरे पाटिल, कांग्रेस ने सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब

कांग्रेस ने राजनीतिक तटस्थता और पद की गरिमा को लेकर भी कई सवाल उठाए। पार्टी ने नियम 3(1) और नियम 3(1A)(ii) का उल्लेख किया। कांग्रेस ने कहा कि पुलिस अधिकारियों का दायित्व कानून का निष्पक्ष पालन करना होता है। पार्टी ने पूछा कि किसी विशेष वैचारिक संगठन की सार्वजनिक प्रशंसा क्या सेवा नियमों के अनुरूप मानी जा सकती है। कांग्रेस ने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं की सबसे बड़ी पहचान उनकी राजनीतिक निष्पक्षता होती है। पार्टी ने आशंका जताई कि ऐसे सार्वजनिक वक्तव्य जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। कांग्रेस ने यह भी पूछा कि यदि दूसरे अधिकारी किसी अन्य राजनीतिक या धार्मिक मंच पर इसी तरह बोलेंगे तो सरकार का रुख क्या रहेगा। पार्टी ने कहा कि प्रशासनिक निष्पक्षता हर अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। कांग्रेस ने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट नीति बताने की मांग की।

संवैधानिक तटस्थता और सर्विस रूल्स को लेकर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

पार्टी ने नियम 3(2B)(ii) और नियम 3(2B)(vi) का हवाला दिया। कांग्रेस ने कहा कि प्रत्येक आईपीएस अधिकारी संविधान के प्रति जवाबदेह रहता है। पार्टी ने पूछा कि किसी विशेष संगठन का सार्वजनिक समर्थन संवैधानिक तटस्थता के अनुरूप कैसे माना जा सकता है। कांग्रेस ने यह भी आशंका जताई कि ऐसे सार्वजनिक संबंध भविष्य के प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।

पार्टी ने कहा कि अधिकारियों को किसी भी संगठन या विचारधारा के प्रभाव से दूर रहना चाहिए। कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि जनता को निष्पक्ष पुलिस व्यवस्था का भरोसा कैसे मिलेगा। पार्टी ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय पूरी तरह कानून और संविधान के आधार पर होने चाहिए। कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने की मांग दोहराई।

5(1) के तहत संगठन से संबंध के मुद्दे पर भी सवाल खड़े किए। पार्टी ने पूछा कि किसी मंच पर सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करना क्या संबंधित संगठन से जुड़ाव की श्रेणी में आएगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सामान्य पुलिसकर्मियों पर छोटे मामलों में भी तत्काल कार्रवाई होती है। पार्टी ने पूछा कि क्या वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के लिए अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि कानून सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

पार्टी ने सरकार पर मामले में चुप्पी साधने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि यह विवाद केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। पार्टी ने इसे प्रशासनिक विश्वसनीयता, पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता और संविधान की सर्वोच्चता से जुड़ा मुद्दा बताया। पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए सरकार से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया।
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