नागपुर में हुई हिंसा का मामला अब संसद में उठ चुका है। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने इस हिंसा पर चर्चा के लिए राज्यसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में 50 लोगों को हिरासत में लिया है और अफवाह फैलाने वालों की पहचान करने में लगी है। सोमवार को नागपुर में मुगल सम्राट औरंगजेब की कब्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद दो गुटों के बीच संघर्ष हुआ। पहले महल क्षेत्र में और फिर हंसापुरी में हिंसा हुई, जिसके परिणामस्वरूप कई इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा।
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कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने नागपुर में हुई हिंसा पर चर्चा के लिए राज्यसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है. नागपुर में अब हालात काबू में हैं. पुलिस का कहना है कि औरंगजेब की कब्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद दो गुटों के बीच टकराव हो गया, जिसके बाद महल इलाके में दोनों ओर से पथराव हुआ. वाहनों में आग लगा दी गई. हिंसा पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठी चार्ज भी किया. हिंसक झड़प में दो समुदायों के युवकों ने एक दूसरे पर पत्थर फेंके, कुछ गाड़ियां तोड़ी गईं, आगजनी हुई. डीसीपी निकेतन कदम पर भी हमला हुआ, गंभीर हालत में डीसीपी कदम को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने आरएसएस मुख्यालय वाले महल में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया.
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नागपुर हिंसा: पुलिस ने 50 लोगों को हिरासत में लिया, शांति बनाए रखने की अपील
हिंसक झड़प में दो समुदायों के युवकों ने एक दूसरे पर पत्थर फेंके, कुछ गाड़ियां तोड़ी गईं, आगजनी हुई. डीसीपी निकेतन कदम पर भी हमला हुआ, गंभीर हालत में डीसीपी कदम को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने आरएसएस मुख्यालय वाले महल में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया. दो अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. नागपुर पुलिस ने प्रोहिबिट्री ऑर्डर इश्यू किया है साथ ही पुलिस ने अब तक 40 से 50 लोगों को हिरासत में लिया है. सीसीटीवी और वीडियो के आधार पर जिन लोगों ने हिंसा को अंजाम दिया उनकी धर पकड़ पुलिस कर रही है.
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नागपुर में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के विरोध प्रदर्शन के बीच पहली अफवाह यह फैली कि एक धार्मिक ग्रंथ को नुकसान पहुंचाया गया है. वहीं, दूसरी अफवाह कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा ये फैलाई गई कि पवित्र चादर को आग लगा दी गई है. हालांकि, कहीं कुछ ऐसा हुआ ही नहीं था. इन अफवाहों से एक समुदाय विशेष के लोग भड़क गए और सड़कों पर उतर आए. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि नागपुर में दंगों की खबरें बेहद परेशान करने वाली हैं. खेड़ा ने कहा कि महल मुख्यमंत्री का अपना क्षेत्र है. पिछले कई दिनों से 300 साल पुराने इतिहास को हथियार बनाकर इसका इस्तेमाल विभाजन, ध्यान भटकाने और अशांति पैदा करने के लिए किया जा रहा है. ये हिंसा केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर सत्तारूढ़ प्रशासन की विचारधारा उजागर करती हैं.


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