इंदौर ने लगातार सात बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा हासिल किया, लेकिन अब शहर गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर ने शहर के कई इलाकों में पानी की भारी कमी पैदा कर दी है। करीब 30 लाख की आबादी वाले इंदौर में लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई बोरवेल सूख चुके हैं और नगर निगम एक दिन छोड़कर नर्मदा का पानी सप्लाई कर रहा है। दूषित पानी की समस्या ने पहले भी शहर में कई लोगों की जान ली थी, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। शहर के सुखलिया, नेहरू नगर, पालदा, चंदन नगर, खजराना, आज़ाद नगर और भागीरथपुरा जैसे इलाकों में पानी की सबसे अधिक समस्या देखी जा रही है। स्थानीय लोग कई दिनों तक पानी नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं।
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इंदौर में गहराया जल संकट
वार्ड 64 की रहने वाली सावित्री बाई ने बताया कि उनकी गली में चार से पांच दिन में सिर्फ एक टैंकर आता है, जिससे सभी परिवारों की जरूरत पूरी नहीं हो पाती। चंदन नगर के ऑटो चालक विक्की ने कहा कि लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पानी की कमी ने आम लोगों की दैनिक जिंदगी को बेहद कठिन बना दिया है। जल संकट को लेकर अब राजनीतिक विरोध भी तेज हो गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के स्थानीय नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस पार्षद कुणाल चौधरी ने अपने वार्ड में पानी की कमी को लेकर धरना दिया और सड़क जाम कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पार्षदों को ज्यादा पानी के टैंकर दिए जा रहे हैं जबकि कांग्रेस क्षेत्रों की अनदेखी की जा रही है।
वहीं कुछ भाजपा पार्षदों और विधायकों ने भी नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई और अपने क्षेत्रों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने की शिकायत की। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने भी मामले को और चर्चा में ला दिया। वीडियो में एक व्यक्ति पुलिस अधिकारी के पैर पकड़कर पानी की समस्या बताता दिखाई दिया। प्रशासन ने सड़क जाम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी और पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों पर मामला भी दर्ज किया। अधिकारियों ने कहा कि शहर में बिना अनुमति आंदोलन करने पर पहले से रोक लगी हुई है। नगर निगम ने दावा किया कि उसने कई इलाकों में पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ा दी है और लगातार निगरानी की जा रही है।


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