अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने विशेष बातचीत में अहम जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बढ़ाने वाली डील पर एक वर्ष तक चर्चा चली। इस प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत फरवरी 2025 में हुई थी। नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच लगातार दौर की बैठकों के बाद समझौता आकार लिया।
राजदूत ने बताया कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देगा। इस व्यवस्था के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को पचास प्रतिशत से घटाकर अठारह प्रतिशत करेगा। वहीं भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कृषि सामान पर शुल्क में कटौती लागू करेगा। उन्होंने इसे भारत के हितों के अनुकूल और संतुलित परिणाम वाला करार दिया।
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भारत-अमेरिका डील: फरवरी 2025 से शुरू हुई प्रक्रिया
क्वात्रा ने कहा कि पूरी वार्ता का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय ने किया। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बातचीत आगे बढ़ाने के लिए तीन से चार बार अमेरिका का दौरा किया। मंत्रालय के मुख्य वार्ताकारों ने तकनीकी और नीति स्तर पर विस्तृत चर्चाएं संचालित कीं। टीम ने दोनों पक्षों के सुझावों के आधार पर समझौते की रूपरेखा तैयार की।
उन्होंने बताया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय वार्ता को व्यक्ति आधारित नजरिये से नहीं देखना चाहिए। दोनों देशों ने तथ्यों और साझा हितों को प्राथमिकता देते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान इसकी नींव रखी गई। उस दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने अपने-अपने देशों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देश तय किए। इन्हीं निर्देशों के आधार पर अधिकारियों ने समानांतर स्तर पर वार्ता को गति दी। लगभग एक वर्ष चली बातचीत में स्वाभाविक उतार-चढ़ाव भी सामने आए। अंततः दोनों पक्षों ने बहुक्षेत्रीय और पारस्परिक लाभ सुनिश्चित करते हुए समझौते को अंतिम रूप दिया।
भारत और अमेरिका ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को पांच सौ अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब दो सौ अरब डॉलर के आसपास है। सरकारों ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया। अधिकारियों ने भरोसा जताया कि नया समझौता इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में सहायक बनेगा।
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