इन दिनों भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) चर्चा में बना हुआ है। संस्थान ने दिल्ली पुलिस में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एफआईआर लिखी गई। इस कार्रवाई के बाद कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जांच के दायरे में आ गए। इन इन्फ्लुएंसर्स ने हाल के दिनों में एफएसएसएआई से जुड़े कई पोस्ट साझा किए थे। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि इन पोस्ट के ज़रिए संस्थान की छवि खराब करने की कोशिश की गई।
एफएसएसएआई देश में खाद्य सुरक्षा मानकों को तय करता है और उनके पालन की निगरानी करता है। यह संस्था खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट की जांच के लिए निरीक्षण भी करती है। एफआईआर के बाद पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को नोटिस भेजा। पुलिस ने कुछ खातों से जुड़ी जानकारी, जैसे ईमेल, फोन नंबर और आईपी एड्रेस, मांगे। नोटिस में पांच अकाउंट्स को चिन्हित किया गया, जिन पर मानहानि के आरोप लगाए गए हैं।
इन इन्फ्लुएंसर्स ने एफएसएसएआई की डायरेक्टर स्वीटी बेहरा की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस पद के लिए पर्याप्त अनुभव नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुनहनी पर भी सवाल किए। कुछ पोस्ट में देश में मिलावटी दूध और पनीर की बिक्री का मुद्दा उठाया गया। मार्च में कई यूज़र्स ने आरोप लगाया कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के खिलाफ हुई है।
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एफएसएसएआई विवाद में इन्फ्लुएंसर्स पर एफआईआर
नोटिस मिलने के बाद एक अकाउंट ने अपने पोस्ट हटा दिए, जबकि अन्य पोस्ट अभी भी ऑनलाइन मौजूद हैं। एक हैंडल चलाने वाले व्यक्ति ने बताया कि उन्हें नोटिस की जानकारी प्लेटफॉर्म के जरिए मिली। उनका कहना है कि वे पिछले कुछ महीनों से एफएसएसएआई में कथित गड़बड़ियों को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एफआईआर किन आधारों पर दर्ज की गई और किन दस्तावेज़ों को गोपनीय बताया जा रहा है।
इन्फ्लुएंसर ने दावा किया कि उन्होंने सभी दस्तावेज़ों की जांच करने के बाद ही उन्हें साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका मकसद मिलावटी खाद्य पदार्थों के मुद्दे को सामने लाना है, जिससे आम लोग प्रभावित होते हैं। उन्होंने एफआईआर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात भी कही। दूसरी ओर, एक अन्य अकाउंट ने तनाव का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर चुप रहने का संकेत दिया।
इस मामले में जांच अभी जारी है और अब तक किसी आरोपी का नाम सामने नहीं आया है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। शिकायत में कहा गया कि कुछ दस्तावेज़ फर्जी हैं और कुछ गोपनीय जानकारी को गलत तरीके से हासिल किया गया। पुलिस ने आपराधिक विश्वासघात, साझा मंशा और आईटी कानून से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने यह भी आशंका जताई कि इस मामले में बाहरी फंडिंग की भूमिका हो सकती है।
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