भोपाल के बड़ा तालाब क्षेत्र में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। FTL सीमा के भीतर बने 350 से अधिक अवैध निर्माण 21 अप्रैल तक हटाए जाएंगे, जिसके लिए एक विशेष टाइमलाइन तय की गई है। 10 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान का लक्ष्य तालाब को अतिक्रमण मुक्त कर उसकी प्राकृतिक संरचना को बचाना है। अधिकारियों ने कहा कि तालाब की सेहत और शहर की जल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए यह कार्रवाई बेहद जरूरी हो गई थी।
अभियान की शुरुआत हलालपुरा इलाके से की गई, जहां जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने JCB की मदद से अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू किया। बैरागढ़ तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में टीम ने सर्वे में चिन्हित सभी अतिक्रमणों की पहचान कर कार्रवाई तेज कर दी। फरवरी और मार्च में हुए सर्वे में मिले तथ्यों के आधार पर सूची तैयार की गई थी। प्रशासन ने दोहराया कि हर अतिक्रमण पर बिना किसी रुकावट या रियायत के कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने भारी सुरक्षा तैनात की और पूरे क्षेत्र को नियंत्रित तरीके से घेराबंदी में रखा। फार्म हाउसों और पक्के निर्माणों को हटाते समय प्रशासनिक दल लगातार निगरानी में रहा, ताकि स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी रहे। टीम ने एक मैरिज गार्डन के सामने मौजूद अवैध फार्म हाउस पर भी बुलडोजर चलाया। अधिकारियों का कहना है कि कई जगहों पर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं, जिन्हें ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है।
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सर्वे के बाद तालाब में तेज हुई कार्रवाई
प्रशासन ने बताया कि दो महीने चले सर्वे ने इस कार्रवाई को ज्यादा सटीक और भ्रमरहित बनाया। सर्वे के दौरान कहीं भी अस्पष्टता न रहे, इसके लिए टीम ने आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया। सूची के अनुसार सभी अवैध निर्माण क्रमवार हटाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी कानूनी चुनौती की संभावना न रहे। प्रशासन का मानना है कि तालाब की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
सर्वे के अनुसार, टीटी नगर एसडीएम क्षेत्र के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे अधिक अतिक्रमण सामने आए, जहां लोगों ने तालाब की सीमा में बड़े पैमाने पर पक्के ढांचे खड़े कर दिए थे। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा क्षेत्रों में भी इसी तरह अनेक निर्माण पाए गए, जो नियमों के खिलाफ थे। प्रशासन इन क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर खाली करा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इन निर्माणों से तालाब के जलस्तर और पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ा है।
इसी बीच, वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में भी कई अनियमितताएं सामने आई हैं। सीमांकन के दौरान करीब 2.5 किलोमीटर क्षेत्र में 100 से अधिक पिलर लगाए जाने की जानकारी ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिविधियां वेटलैंड नियमों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आ सकती हैं। प्रशासन ने इन मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और कहा है कि यदि नियम भंग पाए गए तो यहाँ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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