September 9, 2026

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Anthropic के रिसर्चर ने AI के डर से छोड़ी नौकरी, बताई पूरी कहानी

Anthropic के AI रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने इस्तीफा देकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज विकास दौड़ पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कॉक्सन ने OpenAI और Anthropic में करीब तीन साल तक प्री-ट्रेनिंग रिसर्च पर काम किया। उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद AI सिस्टम की बढ़ती क्षमताओं और उनसे जुड़े संभावित खतरों पर चिंता जाहिर की। उनका मानना है कि कंपनियां ऐसे मॉडल विकसित करने की होड़ में आगे बढ़ रही हैं, जो भविष्य में खुद को बेहतर बनाने में सक्षम हो सकते हैं। ऐसे सिस्टम इंसानी क्षमताओं से काफी आगे निकल सकते हैं। कॉक्सन ने चेतावनी दी कि AI की प्रगति को केवल तकनीकी उपलब्धि के रूप में नहीं देखना चाहिए।

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OpenAI और Anthropic की रणनीति पर उठे सवाल

कॉक्सन ने दावा किया कि AI क्षेत्र में काम करने वाले कई लोग निजी तौर पर इस तकनीक के संभावित खतरों को लेकर गंभीर चिंता रखते हैं। उनके अनुसार, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि दशक खत्म होने से पहले AI इंसानों के लिए बेहद बड़ा जोखिम बन सकता है। हालांकि, कई वरिष्ठ अधिकारी और रिसर्चर सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे पर काफी सावधानी से अपनी बात रखते हैं। कॉक्सन का कहना है कि सुपरइंटेलिजेंट सिस्टम इंसानों की मौजूदा क्षमताओं से बहुत आगे जा सकते हैं। ऐसे सिस्टम हैकिंग, साइबर ऑपरेशन और दूसरे जटिल क्षेत्रों में तेजी से काम कर सकते हैं। उन्होंने AI की क्षमताओं को कम आंकने के खिलाफ चेतावनी दी। कॉक्सन के मुताबिक, AI कंपनियों को केवल मॉडल की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इंसान भविष्य में इन सिस्टम को नियंत्रित कर सकें।

कॉक्सन ने AI कंपनियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा को अपनी चिंता का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने OpenAI और Anthropic को लेकर अलग-अलग दावे किए। कॉक्सन के अनुसार, OpenAI में कुछ लोग AI से जुड़े संभावित सभ्यतागत जोखिमों को पूरी तरह नहीं समझते। वहीं, उनका दावा है कि Anthropic में इन खतरों को गंभीरता से समझा जाता है, लेकिन कंपनी प्रतिस्पर्धा के दबाव से बाहर नहीं निकल पा रही है। उन्हें लगता है कि Anthropic को डर है कि विकास की गति धीमी करने पर दूसरी कंपनियां उससे आगे निकल सकती हैं। कॉक्सन ने कहा कि AI के भविष्य से जुड़े फैसले केवल कंपनियों के आंतरिक मंचों पर नहीं होने चाहिए। उनका तर्क है कि AI का असर पूरी मानवता पर पड़ सकता है। इसलिए इसकी विकास नीति में व्यापक सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक हित को शामिल करना जरूरी है।

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AI रेगुलेशन और सुरक्षा पर जारी बहस

कॉक्सन ने AI लैब्स में काम कर रहे रिसर्चर्स से भी अपनी भूमिका पर विचार करने की अपील की है। उन्होंने पूछा कि क्या वैज्ञानिक सुपरइंटेलिजेंट सिस्टम की कार्यप्रणाली को पूरी तरह समझे बिना उन पर शक्तिशाली रीइंफोर्समेंट लर्निंग तकनीक लागू करना चाहेंगे। उनका कहना है कि रिसर्चर्स को केवल यह सोचकर चुप नहीं रहना चाहिए कि AI विकास की मौजूदा दिशा को बदलना संभव नहीं है। दूसरी ओर, Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने AI रेगुलेशन को लेकर अलग दृष्टिकोण रखा है। उन्होंने कहा कि सही नियम बड़ी AI कंपनियों की ताकत को सीमित कर सकते हैं और छोटी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर दे सकते हैं। अमोदेई ने AI की शक्ति को नियंत्रित करने और इसे व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के बीच किसी एक विकल्प को चुनना जरूरी नहीं माना।

‘मैंने आज एंथ्रोपिक से इस्तीफा दे दिया। मैंने पिछले तीन साल OpenAI और Anthropic दोनों में प्री-ट्रेनिंग रिसर्च करते हुए बिताए हैं। दोनों कंपनियां जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही हैं। वे सीधे खुद को बेहतर बनाने वाली सुपरइंटेलिजेंस बनाने की दौड़ में हैं । हमारी जिंदगी को दांव पर लगा रही हैं।’

‘AI बनाने वाले लोग गंभीरता से मानते हैं । कि यह दशक खत्म होने तक यह तकनीक हम सभी को खत्म कर सकती है। यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है।’

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