मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से चोरी हुई करीब 400 साल पुरानी सिंधियाकालीन तोप की बरामदगी के लिए राजस्थान के करौली जिले में मंगलवार को बड़ा संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया गया। शिवपुरी पुलिस से मिले गोपनीय इनपुट के आधार पर करौली पुलिस, भरतपुर की मेटल डिटेक्टर टीम और 50 से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने हिण्डौन सिटी क्षेत्र के गांवड़ा मीणा गांव में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के चलते पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। हालांकि कई घंटे तक चली कार्रवाई के बाद भी पुलिस को ऐतिहासिक तोप का कोई सुराग नहीं मिला।
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JCB और मेटल डिटेक्टर से हुई खुदाई
पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और खुफिया जानकारी के आधार पर गांवड़ा मीणा के तीन से चार संदिग्ध स्थानों की पहचान की। इसके बाद JCB मशीनों और अत्याधुनिक मेटल डिटेक्टरों की मदद से गहन खुदाई और तलाशी अभियान चलाया गया। अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। देर शाम तक चले अभियान के बावजूद पुलिस को कोई ऐसी वस्तु नहीं मिली, जिससे चोरी हुई तोप की बरामदगी की पुष्टि हो सके। अब जांच एजेंसियां अन्य संभावित ठिकानों और तकनीकी सुरागों पर काम कर रही हैं।
नरवर किले से चोरी हुई यह सिंधियाकालीन तोप ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। करीब तीन टन वजनी इस तोप की अंतरराष्ट्रीय एंटीक बाजार में संभावित कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये आंकी गई है। तोप पर सिंधिया रियासत का राजचिह्न अंकित है और इसके धातु पर देवनागरी तथा फारसी भाषा में दुर्लभ अभिलेख दर्ज हैं। यही विशेषताएं इसे ऐतिहासिक धरोहरों में बेहद खास बनाती हैं और आशंका जताई जा रही है कि इसे किसी संगठित एंटीक तस्करी गिरोह ने निशाना बनाया हो सकता है।
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मोबाइल लोकेशन से राजस्थान तक पहुंची जांच
पुलिस जांच के अनुसार 15-16 जुलाई की मध्यरात्रि को नरवर किले से यह प्राचीन तोप चोरी हुई थी। घटना के बाद साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन राजस्थान के करौली जिले के गांवड़ा मीणा क्षेत्र में मिली। इसी इनपुट के आधार पर मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त रणनीति बनाकर सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि अब तक पुलिस को कोई ठोस सबूत या चोरी हुई तोप नहीं मिली है, लेकिन जांच एजेंसियां मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
जांच एजेंसियां इस मामले को केवल सामान्य चोरी नहीं मान रही हैं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। वहीं पांचना बांध को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही साजिश संबंधी चर्चाओं को लेकर पुलिस ने किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच बेहद संवेदनशील चरण में है और सभी संभावित एंगल्स पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। हिण्डौन सिटी के डीएसपी मुनेश कुमार मीणा और शिवपुरी के एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने बताया कि फिलहाल कोई बड़ा सुराग हाथ नहीं लगा है, लेकिन तकनीकी और खुफिया जांच लगातार जारी है।
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