चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा करीब सात साल बाद हो रहा है। खास बात यह है कि शी जिनपिंग 2023 में भारत में हुए जी20 शिखर सम्मेलन में भी शामिल नहीं हुए थे। कूटनीतिक विशेषज्ञ कमर आगा के मुताबिक, उनका भारत आना दोनों देशों के रिश्तों में अहम बदलाव का संकेत है। इससे साफ है कि भारत और चीन अब गलवान विवाद के दौर से आगे बढ़ना चाहते हैं।
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सीमा विवाद पर बातचीत से बढ़ी उम्मीद
कमर आगा के अनुसार, दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार इस बदलाव की बड़ी वजह है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है और चीन के लिए भारत को नजरअंदाज करना मुश्किल है। चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत भी वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार 151 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुका है। ऐसे में भारत और चीन के लिए एक-दूसरे से पूरी तरह अलग होकर आगे बढ़ना आसान नहीं है।
वहीं, सीमा विवाद को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है। सैन्य स्तर की बातचीत के साथ विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी चर्चा हो रही है। हाल ही में एनएसए अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25वें दौर की बातचीत हुई। इस बैठक में सीमा विवाद के समाधान के लिए आगे का रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई। कमर आगा का कहना है कि दोनों देश अब समझ चुके हैं कि सीमा विवाद का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि बातचीत से ही संभव है।
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गलवान के बाद अब आगे बढ़ने की कोशिश
चीन के लिए भारत का रणनीतिक महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। भारत क्वाड का सदस्य है, लेकिन उसने इसे सैन्य गठबंधन बनाने में रुचि नहीं दिखाई है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि भारत ऑकस जैसे सुरक्षा ढांचे में भी शामिल हो। चीन नहीं चाहता कि भारत उसके खिलाफ किसी मजबूत सैन्य गठबंधन का हिस्सा बने। इसलिए चीन भारत के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने में भी दिलचस्पी दिखा रहा है। इसके साथ ही वह भारत को एशिया की एक महत्वपूर्ण शक्ति के तौर पर स्वीकार कर रहा है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय बातचीत की भी संभावना है। इसमें व्यापार, कनेक्टिविटी और सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देश अब रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में शी जिनपिंग का भारत दौरा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं है। यह भारत-चीन संबंधों में गलवान के बाद एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत भी माना जा रहा है।


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