टोक्यो: उत्तरी जापान में पिछले दो हफ्तों से जारी रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी ने हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। लगातार गिरती बर्फ ने शहरों और गांवों को सफेद चादर में ढक दिया है और अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर मौतें छतों से बर्फ हटाते समय फिसलने, अचानक दिल का दौरा पड़ने और सड़क पर फिसलन के कारण हुए हादसों से हुई हैं। कई इलाकों में बर्फ की मोटाई दो मीटर से अधिक पहुंच गई है, जिससे आम जीवन, यातायात और राहत कार्यों पर गहरा असर पड़ा है।
जापान सरकारी जानकारी के मुताबिक, बुधवार तक 15 प्रीफेक्चर्स इस भीषण मौसम की चपेट में आ चुके हैं। सबसे ज्यादा असर निगाता प्रीफेक्चर में देखा गया है, जहां 12 लोगों की मौत दर्ज की गई। अकिता में सात और यमागाता में पांच लोगों की जान गई है। निगाता के उओनुमा और नागाओका जैसे शहरों में छत से बर्फ हटाते समय बुजुर्गों के फिसलने के कई मामले सामने आए हैं। पूरे देश में अब तक 393 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 126 की हालत गंभीर बताई जा रही है। भारी बर्फ के दबाव से 14 घरों को नुकसान भी पहुंचा है, जिनमें सबसे ज्यादा क्षति निगाता और अओमोरी में हुई है।
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15 प्रीफेक्चर्स में जनजीवन ठप भूस्खलन और हादसों का खतरा बढ़ा जापान
अधिकारियों ने चेताया है कि तापमान में बढ़ोतरी के साथ बर्फ पिघलने लगेगी, जिससे भूस्खलन, छतों से बर्फ गिरने और सड़कों पर फिसलन का खतरा और बढ़ सकता है। मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील करते हुए कहा कि बर्फ हटाते समय सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें और अकेले काम करने से बचें। 20 जनवरी से शुरू हुई इस बर्फबारी को हाल के दशकों की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
यह बर्फबारी खास तौर पर सी ऑफ जापान के तटवर्ती इलाकों—निगाता, अकिता और अओमोरी—में केंद्रित है, जहां साइबेरिया से आई ठंडी हवाओं ने रिकॉर्ड बर्फ जमा कर दी है। अओमोरी में 183 सेंटीमीटर बर्फ दर्ज की गई, जो पिछले 40 वर्षों में सबसे अधिक है। हालात से निपटने के लिए सरकार ने विभिन्न टास्क फोर्स गठित किए हैं और सेल्फ-डिफेंस फोर्सेस को बर्फ हटाने, फंसे लोगों को निकालने और आवश्यक सेवाएं बहाल करने के लिए तैनात किया गया है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी रखते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।


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