अमेरिकी वायुसेना ने इंग्लैंड स्थित RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से अपने सभी बॉम्बर विमान वापस बुला लिए हैं। यह फैसला बेस पर हुई एक संदिग्ध सुरक्षा घटना की जांच के बाद सामने आया है। अमेरिका इस एयरबेस का इस्तेमाल ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों के लिए करता रहा है। पेंटागन के एक अधिकारी ने रविवार को इस घटनाक्रम की जानकारी दी। अधिकारी ने संवेदनशील सैन्य गतिविधियों के कारण अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने बताया कि एयरबेस पर तैनात बॉम्बर विमानों को अमेरिका स्थित उनके मूल बेस पर भेज दिया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य रणनीति पर विचार कर रहा है। हाल के दिनों में RAF फेयरफोर्ड से कई अमेरिकी बॉम्बर विमानों की गतिविधियां दर्ज हुई थीं। सुरक्षा घटना के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने बेस की स्थिति पर विशेष निगरानी बढ़ाई है।
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RAF फेयरफोर्ड से B-1 बॉम्बर ने भरी उड़ान
एविएशन गतिविधियों पर नजर रखने वाले समूहों ने फेयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिकी बॉम्बर विमानों की आवाजाही दर्ज की। ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद यहां B-52 और B-1 बॉम्बर दिखाई दिए। रविवार को जानकारों ने एयरबेस से कई B-1 बॉम्बर विमानों को उड़ान भरते देखा। इन गतिविधियों ने अमेरिकी सैन्य तैनाती को लेकर नई अटकलें तेज कर दी हैं। अमेरिका ने हालांकि विमानों की वापसी का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। पेंटागन अधिकारी ने केवल इतना बताया कि विमानों को अमेरिका वापस भेजा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय ईरान को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इन विकल्पों में संभावित नए सैन्य हमले भी शामिल बताए जा रहे हैं। ट्रंप ने हाल ही में ईरान को लेकर अमेरिका की अगली रणनीति पर संकेत दिया था। उन्होंने कहा कि ईरान बुरी तरह कमजोर हो चुका है और अब फैसला लेना बाकी है।
RAF फेयरफोर्ड से जुड़ी सुरक्षा घटना के बाद ब्रिटेन में जांच भी तेज हुई। सितंबर के अंत में एयरबेस पर एक सुरक्षा घटना सामने आई थी। इसके बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने संभावित आतंकी साजिश के एंगल से जांच शुरू की। जांच के दौरान सेंट्रल लंदन में एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने उस व्यक्ति पर आतंकी हमले की साजिश में शामिल होने का संदेह जताया। जांच एजेंसियों ने इस मामले में कुल छह लोगों को हिरासत में लिया। बाद में अधिकारियों ने सभी संदिग्धों को जमानत पर रिहा कर दिया। ब्रिटिश अधिकारियों ने इस मामले के तार ईरान से जुड़े होने की बात कही। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। तेहरान ने पहले भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर कड़ा रुख अपनाया था।
ब्रिटेन में ईरान से जुड़े हमलों को लेकर चिंता
ब्रिटिश अधिकारियों ने ईरान से जुड़े संभावित खतरों को लेकर पहले भी चेतावनी दी है। अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से जुड़े प्रॉक्सी समूह कई देशों में हिंसक गतिविधियां कर सकते हैं। ब्रिटेन में कुछ आगजनी और अन्य हमलों की घटनाओं को लेकर जांच हुई है। अधिकारियों ने इनमें से कई घटनाओं को यहूदी समुदाय को निशाना बनाने से जोड़ा। सुरक्षा एजेंसियों ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण खतरे के बढ़ने की आशंका जताई। उनका मानना है कि संघर्ष लंबा चलने पर ईरान अपने संभावित निशाने बढ़ा सकता है। इस आशंका ने ब्रिटेन में महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है। RAF फेयरफोर्ड भी अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के कारण महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां लंबे समय से अमेरिकी रणनीतिक बॉम्बर विमानों की आवाजाही होती रही है।
अमेरिका ने ऐसे समय बॉम्बर विमानों को वापस बुलाया है, जब ईरान के खिलाफ उसकी रणनीति चर्चा में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर आगे के फैसलों का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को लेकर उन्हें कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेने हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान पहले ही भारी नुकसान झेल चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका के सामने आसान और मुश्किल दोनों विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में ब्रिटेन से अमेरिकी बॉम्बर विमानों की वापसी को विशेषज्ञ अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ जानकार इसे सुरक्षा संबंधी एहतियाती कदम मान रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे अमेरिकी सैन्य रणनीति में संभावित बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल पेंटागन ने इस कदम को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
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