पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका और इसराइल लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हमलों ने ईरान की कमांड संरचना को पंगु बना दिया है और उसकी जवाबी क्षमता घटा दी है। उनके मुताबिक, इस संघर्ष को अब खत्म होने की ओर बढ़ जाना चाहिए था। लेकिन ज़मीनी हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा है और हालात ज्यादा जटिल होते जा रहे हैं।
हाल ही में सामने आया कि ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे की ओर लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं। हालांकि ये मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन इस घटना ने ईरान की क्षमता को लेकर नई चिंता पैदा कर दी। अब तक माना जाता था कि ईरान की मिसाइलों की सीमा सीमित है, लेकिन यह घटना अलग संकेत देती है। इससे साफ होता है कि सैन्य दबाव के बावजूद ईरान अपनी ताकत बनाए हुए है। यह स्थिति अमेरिका और इसराइल की रणनीति पर सवाल खड़े करती है।
ईरान के नेतृत्व को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। मोजतबा ख़ामेनेई के बारे में कहा जा रहा है कि वह हमले में बच गए, लेकिन अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उनकी स्थिति और नेतृत्व क्षमता को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है। एक केंद्रीकृत सत्ता व्यवस्था में यह चुप्पी बड़ी अनिश्चितता पैदा करती है। इसके बावजूद ईरान की सैन्य गतिविधियां किसी कमजोरी का संकेत नहीं देतीं।
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अमेरिका-ईरान जंग में बढ़ती मुश्किलें
ईरान ने इसराइल के डिमोना क्षेत्र पर हमला कर यह दिखाया कि वह जवाब देने में सक्षम है। यह हमला ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों के जवाब में किया गया था। इससे संकेत मिलता है कि संघर्ष बढ़ने पर दोनों पक्ष अहम ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। अमेरिका और इसराइल की “शॉक एंड ऑ” रणनीति इस धारणा पर आधारित थी कि नेतृत्व खत्म होने से सिस्टम टूट जाएगा। लेकिन अब यह रणनीति पूरी तरह सफल होती नहीं दिख रही है।
कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति जटिल बनी हुई है। ईरान का मानना है कि बातचीत से हमले नहीं रुकते, बल्कि कई बार उनके बाद ही हमले शुरू हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के लिए अल्टीमेटम दिया और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान ने भी जवाबी धमकी दी, जिससे टकराव और बढ़ गया। हालांकि बाद में अमेरिका ने संभावित हमलों पर अस्थायी रोक लगाकर बातचीत की गुंजाइश छोड़ी।
अब दोनों देशों के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। होर्मुज़ में बाधा और बढ़ते तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ रहा है। अमेरिका और इसराइल हवाई हमलों से निर्णायक जीत हासिल नहीं कर पा रहे हैं, जबकि ईरान भी बिना कमजोर दिखे पीछे नहीं हट सकता। यह स्थिति दोनों पक्षों को एक खतरनाक मोड़ की ओर ले जा रही है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष और ज्यादा गंभीर रूप ले सकता है।


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