अमेरिका को आमतौर पर ‘अंकल सैम’ कहा जाता है, जो वैश्विक आर्थिक शक्ति माना जाता है।अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका पहले जैसा ताकतवर देश अभी भी है।कई प्रमुख क्षेत्रों में अब अमेरिका की शीर्ष स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रह गई है।चीन ने इन क्षेत्रों में बढ़त लेकर अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दबदबा बना लिया है।अमेरिका की वैश्विक भूमिका में गिरावट अब विश्लेषण और चिंता का मुख्य कारण बन गई है।
Also Read:डाक विभाग का बड़ा फैसला: रजिस्ट्री सेवा होगी बंद, स्पीड पोस्ट से होगा काम
चीन ने आक्रामक वैश्विक व्यापार नीति से अमेरिका को कई क्षेत्रों में पीछे छोड़ दिया है।सेमीकंडक्टर्स, 5G, इलेक्ट्रिक वाहन, और हरित ऊर्जा में चीन ने जबरदस्त तरक्की हासिल की है।चीन ने इन क्षेत्रों में तेज़ उत्पादन, नवाचार और निर्यात से वैश्विक नेतृत्व पर कब्जा जमाया।भारत और अन्य देशों ने भी औद्योगिक प्रगति में उल्लेखनीय गति से विकास करना शुरू किया है।
यूरोपीय संघ के कई देश तकनीकी और हरित विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।इन घटनाक्रमों ने अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को खुली चुनौती देनी शुरू कर दी है।अब अमेरिका नीतिगत बदलाव कर पुरानी स्थिति हासिल करने की गंभीर कोशिश कर रहा है।लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा इतनी तेज़ है कि केवल टैरिफ से स्थिति सुधरना मुश्किल है।
Also Read:सरकारी दफ्तरों का नया ठिकाना, PM मोदी करेंगे उद्घाटन
नई ताकतें उभर रहीं, अमेरिका को चाहिए रणनीतिक पुनर्गठन
वैश्वीकरण और तकनीकी उन्नति ने उत्पादन केंद्रों को अमेरिका से एशिया की ओर धकेल दिया।कई वैश्विक कंपनियों ने लागत घटाने हेतु भारत और चीन में निवेश काफी बढ़ा दिया।इस बदलाव से अमेरिका की पारंपरिक निर्माण क्षमताएं धीरे-धीरे कमजोर और अस्थिर होती चली गईं।देश में मैन्युफैक्चरिंग घटने से बेरोजगारी बढ़ी और औद्योगिक गतिविधियों में भारी गिरावट आई।ट्रंप की टैरिफ नीति इन गिरती प्रवृत्तियों को पलटने का प्रयास करती हुई दिख रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका को अधिक व्यापक रणनीति की आवश्यकता अब महसूस हो रही।टिकाऊ प्रतिस्पर्धा हेतु नई तकनीक, बुनियादी ढांचा और शिक्षा में ठोस निवेश आवश्यक हो गया।टैरिफ केवल अस्थायी उपाय है, दीर्घकालिक आर्थिक समाधान इससे संभव नहीं हो पाएगा।
भारत, चीन और यूरोपीय देशों ने अमेरिका को कई क्षेत्रों में कड़ी चुनौती देना शुरू किया।अब अमेरिका उन क्षेत्रों में पिछड़ रहा है, जहां पहले उसका वर्चस्व मजबूत माना जाता था।मैन्युफैक्चरिंग, इस्पात, ऑटोमोबाइल और ग्रीन एनर्जी में अब नये खिलाड़ी तेज़ी से उभर रहे हैं।चीन ने कम लागत और बेहतर तकनीकी दक्षता से वैश्विक बाजारों में बढ़त हासिल कर ली।भारत आत्मनिर्भर भारत मिशन और तकनीकी विकास में उल्लेखनीय प्रगति करता हुआ आगे बढ़ रहा है।इन देशों के प्रयासों ने वैश्विक औद्योगिक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलकर रख दिया।अब अमेरिका को अपनी नीति में गहराई से बदलाव कर प्रतिस्पर्धा को गंभीरता से लेना होगा।
Also Read:FASTag उपयोगकर्ताओं को 15 अगस्त से मिलेगा Rs.3,000 का वार्षिक पास विकल्प


More Stories
Noida: Man Dies by Suicide After Jumping From 43rd Floor of Supernova Society, Video Surfaces
पत्नी ने कहा- पन्ना चलो, हीरे खोजेंगे; दो दिन में मिले 4 हीरे, बदली परिवार की किस्मत
Land of UP Madrasa Teacher Seized by ED in UK Citizenship Salary Case