अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सख्त रुख से पीछे हटते हुए कहा कि अमेरिका को विदेशी कुशल पेशेवरों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि केवल बेरोजगारों पर निर्भर रहकर अमेरिका अपनी इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी को नहीं बढ़ा सकता। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी उद्योगों और रक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञों की आवश्यकता है, और इस बदलाव के लिए विदेशी टैलेंट का स्वागत किया जाना चाहिए, ताकि अमेरिका वैश्विक स्तर पर आगे बना रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नई वीजा नीति में बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत एच-1बी वीजा आवेदन की फीस में भारी बढ़ोतरी की गई है। अब नए वीजा के लिए फीस 1,500 डॉलर से बढ़कर 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) हो गई है, जो 21 सितंबर के बाद दाखिल किए गए सभी नए आवेदन और 2026 की वीजा लॉटरी में शामिल होने वालों पर लागू होगी। हालांकि, जो लोग पहले से वीजा पर हैं, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में कुछ खास स्किल्स की कमी है और बेरोजगारों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे बिना अनुभव के नए कौशल सीख सकें, जैसे मिसाइल बनाने की क्षमता।
ट्रंप ने जॉर्जिया का उदाहरण देते हुए कहा विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत
राष्ट्रपति ट्रंप ने जॉर्जिया राज्य का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां ह्युंडई बैटरी फैक्ट्री में जब दक्षिण कोरिया से आए कुशल मजदूरों को वापस भेजा गया, तो उत्पादन में गंभीर समस्याएं आईं। ट्रंप ने कहा कि बैटरियां बनाना एक जटिल और खतरनाक काम है, जिसमें कई बार विस्फोट की घटनाएं होती हैं। कोरिया से आए श्रमिक इस काम में माहिर थे और अमेरिकी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रहे थे, लेकिन जब उन्हें वापस भेज दिया गया, तो पूरी प्रक्रिया ठप हो गई। यह बयान ट्रंप के पुराने रुख से अलग था, जहां वह विदेशी कामगारों के खिलाफ थे, लेकिन अब उन्होंने स्वीकार किया है कि कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में वर्षों लग सकते हैं, इस बीच विशेषज्ञों को लाना जरूरी है।
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