ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह तय समय सीमा से पहले समझौता नहीं करता, तो अमेरिका उसे “एक ही रात में खत्म” कर सकता है। उन्होंने साफ कहा कि कार्रवाई मंगलवार रात भी हो सकती है। ट्रंप ने अपनी शर्त में Strait of Hormuz को खोलने पर ज़ोर दिया, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई गुजरती है। उन्होंने इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी बताया। इस बयान से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के कुछ नेता “अच्छी नीयत” से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन नतीजे को लेकर उन्होंने अनिश्चितता जताई। दूसरी ओर, ईरान ने अस्थायी युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उसने साफ तौर पर स्थायी शांति और प्रतिबंध हटाने की मांग रखी। दोनों पक्षों के रुख के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे हालात और तनावपूर्ण बने हुए हैं।
व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने दक्षिणी ईरान में गिरे एक एफ़-15 विमान के दो अमेरिकी क्रू सदस्यों के रेस्क्यू ऑपरेशन की सराहना की। उन्होंने इस मिशन को “बहादुरी भरा” बताया। साथ ही उन्होंने फिर दोहराया कि अगर डेडलाइन तक स्ट्रेट नहीं खुलता, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर हमला करेगा। उन्होंने अपनी चेतावनी को और कड़ा करते हुए त्वरित कार्रवाई की बात कही।
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ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक ही रात में ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि पुल और पावर प्लांट जैसे अहम ढांचे नष्ट कर दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि डेडलाइन के बाद ईरान को “पाषाण युग” में भेज दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत को लेकर हल्की उम्मीद भी जताई। लेकिन अधिकारियों का मानना है कि सीज़फायर के बिना कोई ठोस प्रगति संभव नहीं है।
पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन संचार समस्याओं के कारण बातचीत धीमी चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि ईरान तक संदेश पहुंचाने और जवाब पाने में काफी समय लग रहा है। ट्रंप ने कहा कि उनके पास एक मजबूत योजना है, लेकिन उन्होंने इसे सार्वजनिक नहीं किया। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि नागरिक ढांचे पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
ट्रंप ने इन कानूनी चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि ईरान की जनता आज़ादी के लिए कठिनाइयों का सामना कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार गिराना नहीं है। साथ ही उन्होंने ब्रिटेन, नाटो और दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगियों की आलोचना की कि उन्होंने पर्याप्त समर्थन नहीं दिया। अमेरिकी सैन्य आंकड़ों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से हजारों हमले हो चुके हैं। इससे साफ है कि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
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