भारत ने सुपर आठ मुकाबले में चौंकाने वाला फैसला लेते हुए उपकप्तान अक्षर पटेल को बाहर बैठाया। टीम प्रबंधन ने वॉशिंगटन सुंदर को मौका देकर रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में यह दांव पूरी तरह उल्टा साबित हुआ। भारत को 76 रन की करारी हार झेलनी पड़ी और फैसले पर बहस तेज हो गई।
मैच के बाद असिस्टेंट कोच रायन टेन डेशकाटे ने चयन रणनीति पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि टीम संयोजन और विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को ध्यान में रखा गया। साउथ अफ्रीका के शीर्ष क्रम में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज शामिल थे। इसी कारण प्रबंधन ने ऑफ स्पिन विकल्प को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।
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अक्षर पटेल को बाहर रखने का फैसला हार के बाद सवालों के घेरे में है, क्योंकि मध्य ओवरों में टीम की पकड़ कमजोर पड़ती साफ दिखाई दी।
कोच ने स्पष्ट किया कि क्विंटन डी कॉक, रयान रिकेल्टन और डेविड मिलर मुख्य खतरे थे। टीम ने माना कि ये तीनों पावरप्ले में आक्रामक शुरुआत दे सकते हैं। प्रबंधन ने सोचा कि सुंदर नई गेंद से बेहतर नियंत्रण स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि दो विकल्पों में से परिस्थितियों के अनुसार एक चुनना आवश्यक था।
आंकड़े बताते हैं कि पावरप्ले में बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ सुंदर प्रभावी रहे हैं। उन्होंने 57 पारियों में 23 विकेट लेकर बेहतर औसत दर्ज किया है। वहीं अक्षर ने 62 पारियों में 14 विकेट हासिल किए हैं। हालांकि मध्य ओवरों में अक्षर का प्रदर्शन अधिक भरोसेमंद और आक्रामक रहा है।
मिडिल ओवर्स में अक्षर ने 79 पारियों में 63 विकेट लेकर प्रभाव डाला है। इसके मुकाबले सुंदर ने 48 पारियों में केवल 23 विकेट अपने नाम किए। इस मुकाबले में वरुण चक्रवर्ती महंगे साबित हुए और दबाव बढ़ा। सुंदर ने बीच के ओवरों में दो ओवर फेंके और 17 रन देकर विकेट नहीं लिया।
साउथ अफ्रीका ने शुरुआती झटकों के बाद शानदार वापसी करते हुए मैच पर पकड़ बनाई। एक समय 20 रन पर तीन विकेट गिरने के बावजूद बल्लेबाजों ने संयम दिखाया। डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस ने साझेदारी कर भारतीय गेंदबाजी पर दबाव डाला। मध्य ओवरों में विकेट नहीं मिलने से भारत पिछड़ा और विपक्ष ने बड़ा स्कोर बनाकर जीत दर्ज की।
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