इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को सऊदी अरब की बदलती विदेश नीति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि तुर्की और क़तर के साथ सऊदी अरब की बढ़ती नज़दीकी पर इसराइल लगातार नज़र रखे हुए है। प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान द टाइम्स ऑफ़ इसराइल के सवाल पर नेतन्याहू ने यह बात कही। उन्होंने साफ किया कि जो देश इसराइल के साथ संबंध सामान्य करना चाहते हैं, उनसे कुछ अपेक्षाएं भी होती हैं। उनके मुताबिक, ऐसे देशों को शांति के खिलाफ की जा रही कोशिशों से दूरी बनानी चाहिए। इसलिए, सऊदी अरब के क्षेत्रीय संबंध इसराइल के लिए अहम बन गए हैं।
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अक्तूबर 2023 के बाद मध्य-पूर्व की कूटनीति और जटिल हुई
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने दक्षिणी इसराइल पर हमला किया था। इसके बाद इसराइल ने ग़ज़ा में सैन्य अभियान शुरू किया। नतीजतन, इसराइल और सऊदी अरब के बीच चल रही सामान्यीकरण की कोशिशें ठप हो गईं। सऊदी अरब पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह इसराइल से संबंध तभी स्थापित करेगा। उसकी शर्त है कि 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र बने। इस रुख के कारण दोनों देशों के रिश्ते आगे नहीं बढ़ सके। हालांकि, 2020 में हालात अलग थे। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान ने इसराइल से संबंध सामान्य किए। इससे यह उम्मीद जगी थी कि सऊदी अरब भी आगे बढ़ सकता है। लेकिन अक्तूबर 2023 के बाद क्षेत्रीय हालात काफी जटिल हो गए।
फ़लस्तीनी राज्य की शर्त पर कायम है सऊदी अरब का रुख
गुरुवार को अल-जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने मध्य-पूर्व में बदलते राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अब किसी एक देश का वर्चस्व नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, न तुर्की, न अरब, न फ़ारसी और न ही कोई अन्य शक्ति प्रभुत्व जमाए। इसके बजाय, फ़िदान ने ज़ोर दिया कि मध्य-पूर्व के देश अब एक-दूसरे के क़रीब आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देश साझा ज़िम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसी संदर्भ में, उन्होंने यूरोपीय संघ का उदाहरण दिया। फ़िदान ने कहा कि यूरोपीय संघ ने शून्य से शुरुआत की और खुद को संगठित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि मध्य-पूर्व ऐसा क्यों नहीं कर सकता।
इसी बीच, हाल के महीनों में सऊदी अरब क्षेत्रीय राजनीति में नई दिशा की ओर बढ़ता दिख रहा है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच प्रतिद्वंद्विता तेज़ हुई है। वहीं, सऊदी अरब और तुर्की के रिश्तों में क़रीबी बढ़ती नज़र आ रही है। दूसरी ओर, इसराइल के यूएई के साथ संबंध सामान्य बने हुए हैं। हालांकि, इसराइल और तुर्की के रिश्तों में अब भी तनाव बना हुआ है। इन बदलते समीकरणों ने मध्य-पूर्व की राजनीति को और जटिल बना दिया है। क्षेत्र में नए गठजोड़ और रणनीतिक संतुलन उभरते दिख रहे हैं।


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