रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध आज 1000वें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह संघर्ष द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे घातक संकट बन गया है। अब तक, इस युद्ध में दस लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं। 2022 में शुरू हुए इस युद्ध ने यूक्रेन के शहरों, कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया है। जान-माल की भारी क्षति के बीच दोनों देशों के नागरिक और सैनिक लगातार संघर्ष का सामना कर रहे हैं।
रूस-यूक्रेन की जनसंख्या पर पड़ा विनाशकारी प्रभाव
इस युद्ध ने दोनों देशों की जनसंख्या को बुरी तरह प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 80,000 यूक्रेनी सैनिक मारे गए हैं, जबकि चार लाख से अधिक घायल हुए हैं। रूस के हताहतों के आंकड़े भी लाखों में हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि यूक्रेन में अब तक 11,743 नागरिक मारे गए हैं, जिनमें 589 बच्चे शामिल हैं। युद्ध के कारण यूक्रेन की 25% आबादी खत्म हो चुकी है। करीब 60 लाख नागरिक विदेशों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
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यूक्रेनी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
युद्ध ने यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। 2022 में आर्थिक गिरावट 33% तक पहुंच गई, और अब तक यूक्रेन को 152 अरब डॉलर का सीधा नुकसान हुआ है। पुनर्निर्माण की अनुमानित लागत 486 अरब डॉलर से अधिक है। रूस के हमलों से यूक्रेन का ऊर्जा क्षेत्र और अन्य बुनियादी ढांचे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, कृषि और वाणिज्य क्षेत्रों को भी भारी नुकसान हुआ है, हालांकि निर्यात में सुधार के प्रयास जारी हैं।
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रूस के कब्जे और यूक्रेनी पहचान पर विवाद
रूस ने अब तक यूक्रेन के करीब 1/5 हिस्से पर कब्जा कर लिया है, जिसमें डोनबास क्षेत्र और अजोव सागर का तट शामिल है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दावा है कि यूक्रेन को रूस का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने यूक्रेनी पहचान को नकारते हुए इसे रूसी संस्कृति का ही हिस्सा बताया है। यह संघर्ष न केवल जान-माल की क्षति का कारण बना है, बल्कि इसने वैश्विक संकट को भी जन्म दिया है, जिसमें दोनों देशों की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्थाएं गहरे संकट में हैं।


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