एक समय था जब पाकिस्तान अफगानिस्तान को अपनी रणनीतिक गहराई बताता था। हालाँकि, वही पाकिस्तान अब तालिबान से परेशान दिख रहा है। भस्मासुर की कहानी की तरह, वरदान मिलने के बाद उसने गद्दारी कर दी। भगवान शंकर के पीछे दौड़ते हुए वह अंततः अपने ही वरदान से स्वयं नष्ट हुआ। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अपनी भूमिका को रणनीतिक लाभ मानते हुए कई फैसले लिए। पाकिस्तान की प्राथमिकताओं और तालिबान की कार्रवाई में अंतर गहरा रहा। इस वजह से पाकिस्तान के लिए तालिबान सिरदर्द बन गया। विदेश मंत्री इशाक डार ने सीनेट में इस स्थिति को गंभीर रूप में उजागर किया। उन्होंने पाकिस्तान की गलतियों और पिछली नीतियों पर रोशनी डाली। डार ने यह स्पष्ट किया कि तालिबान ने पाकिस्तान की उम्मीदों को निराश किया।
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भस्मासुर और पाकिस्तान की तुलना
इशाक डार ने कहा कि काबुल में चाय पीना पाकिस्तान के लिए महंगा साबित हुआ। उन्होंने सीनेट में बोलते हुए तत्कालीन पीटीआई सरकार की आलोचना की। डार ने बताया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के लिए अपनी सीमाएं खोल दी थीं। इस निर्णय को उन्होंने सबसे बड़ी राजनीतिक भूल करार दिया। डार ने कहा कि ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को इसके नतीजे आज तक भुगतने पड़ रहे हैं। विदेश मंत्री ने यह उदाहरण देने के लिए ‘चाय का प्याला’ की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन नेताओं और ISI प्रमुख की कार्रवाई ने समस्या को जन्म दिया। डार ने राजनीतिक जिम्मेदारी और रणनीतिक समझ की कमी को उजागर किया। उनका बयान पाकिस्तान की रणनीति पर गंभीर प्रश्न उठा रहा है।
डार ने ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद की 2021 की यात्रा का जिक्र किया। फैज हमीद ने काबुल जाकर तालिबान अधिकारियों के साथ चाय पी थी। यह पाकिस्तान की अफगानिस्तान नीति की प्रतीकात्मक पहल मानी गई। उस समय अमेरिका और सहयोगी सेनाओं की वापसी के तुरंत बाद यह कदम उठाया गया। फैज हमीद ने दुनिया को दिखाने की कोशिश की कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ है। डार ने कहा कि यह निर्णय पाकिस्तान के लिए महंगा साबित हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय की रणनीतिक सोच ने आज तक असर डाला। यह घटना पाकिस्तान की राजनीतिक और सुरक्षा नीतियों में गलती को दर्शाती है। डार ने यह दिखाया कि निर्णयों के दीर्घकालिक परिणामों की अनदेखी हुई। इस गलती का भुगतान पाकिस्तान आज भी कर रहा है।
आतंकवाद और तालिबान का असर
डार ने पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों की बढ़ोतरी को अफगानिस्तान से जोड़ा। उन्होंने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और फितना अल-ख्वारिज का उल्लेख किया। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को भी इस सूची में शामिल किया गया। डार का कहना था कि ये संगठन अफगान धरती से ऑपरेट कर रहे हैं। उन्होंने सीनेट में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान इन समूहों से गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। यह स्थिति तालिबान की कार्रवाई और पाकिस्तान की नीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सुरक्षा और रणनीति में सुधार करना चाहिए। डार ने समस्या की जटिलता और सीमा पार आतंकवाद को उजागर किया। उनका बयान वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों पर सरकार की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। तालिबान और आतंकवादी संगठनों की भूमिका पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
डार ने पाकिस्तान को रणनीति और भविष्य के लिए चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तालिबान ने पाकिस्तान की उम्मीदों के विपरीत काम किया। ‘चाय का प्याला’ पाकिस्तान की पुरानी नीतियों का प्रतीक बन गया। डार ने स्पष्ट किया कि सीमाओं और विदेश नीति में सतर्कता आवश्यक है। उन्होंने इमरान खान और तत्कालीन प्रशासन की गलतियों को भी सामने रखा। यह घटना पाकिस्तान को गंभीर राजनीतिक और रणनीतिक सबक सिखाती है। डार के बयान ने पाकिस्तान में नीतिगत और सुरक्षा सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालिबान के साथ संबंधों में संतुलन और समझ जरूरी है। पाकिस्तान को अपनी रणनीतिक गहराई और अफगान नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह सबक भविष्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शन साबित हो सकता है।


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