March 6, 2026

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पीएम मोदी से खास गर्मजोशी: नेतन्याहू का दुनिया को क्या संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय इसराइल दौरे के पहले दिन यरुशलम पहुंचकर वहां की संसद कनेसेट को संबोधित किया। वे कनेसेट में बोलने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। अपने संबोधन में उन्होंने भारत-इसराइल संबंधों को ऐतिहासिक और भावनात्मक बताया। उन्होंने याद दिलाया कि 17 सितंबर 1950 को भारत ने इसराइल को मान्यता दी थी, और उसी दिन उनका जन्म हुआ। इस प्रतीकात्मक जुड़ाव के जरिए उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का संदेश दिया।

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कनेसेट में मोदी को “दोस्त से बढ़कर भाई” कहकर संबोधित किया। दोनों नेताओं के बीच दिखी गर्मजोशी ने इस यात्रा को खास बना दिया। नेतन्याहू ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि भारत और इसराइल का रिश्ता सिर्फ लेन-देन तक सीमित नहीं है। उन्होंने इसे दो सभ्यताओं के गहरे और स्थायी संबंध के रूप में प्रस्तुत किया। अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के दौर में उन्होंने दिखाया कि दोनों देश मजबूती से साथ खड़े हैं।

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कनेसेट में मोदी-नेतन्याहू की खास गर्मजोशी

इसराइल में होने वाले चुनावों के मद्देनज़र नेतन्याहू इस कूटनीतिक पहल को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं। ग़ज़ा युद्ध के बाद वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव झेलते दिखे थे। ऐसे समय में उन्होंने यह संदेश दिया कि इसराइल अलग-थलग नहीं है और भारत जैसे बड़े देश का समर्थन उसके साथ है। उन्होंने घरेलू राजनीति में अपनी नेतृत्व क्षमता को मजबूत दिखाने की कोशिश की। वे यह भी जताना चाहते हैं कि वे वैश्विक नेताओं के साथ बराबरी से संवाद कर सकते हैं।

भारत ने इस यात्रा के दौरान आर्थिक और तकनीकी सहयोग को भी प्रमुखता दी। दोनों देश व्यापार को लगभग चार अरब डॉलर से आगे बढ़ाने और मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। मोदी ने कृषि और सिंचाई तकनीक में इसराइल की भूमिका को सराहा, खासकर ‘हर बूंद ज्यादा फसल’ जैसी तकनीकों का उल्लेख किया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत तकनीकी हस्तांतरण में इसराइल के साथ और गहराई से जुड़ना चाहता है। इस पहल से रक्षा के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का मार्ग खुलता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्तूबर 2023 के हमास हमले की स्पष्ट निंदा की और साथ ही ग़ज़ा में शांति प्रयासों का समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख रखता है, क्योंकि वह खुद लंबे समय तक इसका सामना करता रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत फ़लस्तीन मुद्दे को मानवीय आधार पर सुलझाने का समर्थन करता है। भारत ने संतुलित नीति अपनाते हुए इसराइल के साथ अपने मजबूत संबंधों को बनाए रखने का संकेत दिया। इस तरह भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी स्वतंत्र और व्यावहारिक कूटनीति को रेखांकित किया।

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